चौढ़ा-पत्थलगांव सड़क निर्माण को लेकर उठे सवाल, पुराने काम का हवाला देकर विनायक कंपनी की भूमिका पर ग्रामीणों ने जताई आपत्ति
पहले हुए सड़क निर्माण में गुणवत्ता को लेकर शिकायतों का दावा, नए काम की जिम्मेदारी मिलने से पहले ही जांच की मांग
कुड़ेकेला। चौढ़ा से पत्थलगांव के बीच प्रस्तावित सड़क निर्माण कार्य को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्र के कुछ ग्रामीणों और लोगों ने निर्माण कार्य से जुड़ी विनायक कंपनी की भूमिका पर आपत्ति जताते हुए पुराने सड़क निर्माण कार्य का हवाला दिया है। लोगों का कहना है कि पहले किए गए काम की गुणवत्ता को लेकर जिस तरह की शिकायतें सामने आई थीं, उन्हें देखते हुए नए निर्माण की गुणवत्ता पर शुरुआत से ही निगरानी जरूरी है।
पुराने निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठी थी शिकायत
स्थानीय लोगों के अनुसार पूर्व में चौढ़ा से पत्थलगांव के बीच सड़क निर्माण का काम इसी कंपनी को पेटी ठेके के माध्यम से मिला था। ग्रामीणों का दावा है कि सड़क निर्माण के कुछ समय बाद ही बारिश में कई स्थानों पर डामर उखड़ने और सड़क पर गड्ढे बनने की समस्या सामने आई थी।
हालांकि उस समय निर्माण में वास्तविक तकनीकी कमी कितनी थी और सड़क खराब होने के पीछे क्या कारण रहे, इसका स्पष्ट निष्कर्ष संबंधित विभाग की गुणवत्ता जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।
नए काम की जिम्मेदारी को लेकर ग्रामीणों में सवाल
अब इसी क्षेत्र में दोबारा निर्माण कार्य से जुड़ी जिम्मेदारी मिलने की जानकारी के बाद स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नए काम की शुरुआत से पहले पिछले निर्माण की गुणवत्ता और उससे जुड़ी शिकायतों की समीक्षा की जानी चाहिए।
लोगों की चिंता है कि यदि पुराने काम में किसी स्तर पर कमी पाई गई थी तो उसी एजेंसी को दोबारा काम दिए जाने से पहले उसकी कार्यक्षमता और गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था की जांच क्यों नहीं की गई।
निर्माण शुरू होने से पहले गुणवत्ता निगरानी की मांग
स्थानीय लोगों ने सड़क निर्माण शुरू होने से पहले ही संबंधित विभाग से निगरानी व्यवस्था स्पष्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क की बेस लेयर, डामरीकरण, सामग्री की गुणवत्ता, मोटाई और जल निकासी जैसी तकनीकी व्यवस्थाओं की नियमित जांच होनी चाहिए।
ग्रामीणों के मुताबिक निर्माण के दौरान गुणवत्ता पर नजर रखने के बजाय सड़क तैयार होने के बाद खामियां सामने आने पर कार्रवाई करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।
जनता के पैसे और सड़क की टिकाऊपन को लेकर चिंता
क्षेत्रवासियों का कहना है कि सड़क निर्माण पर सरकारी राशि खर्च होती है, इसलिए निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए। यदि सड़क निर्धारित मानकों के अनुरूप तैयार नहीं होती और कुछ ही समय में खराब होने लगती है तो इसका सीधा असर आम लोगों के आवागमन और सरकारी संसाधनों पर पड़ता है।
निष्पक्ष तकनीकी जांच की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि पूर्व में किए गए सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता से संबंधित रिकॉर्ड और शिकायतों की समीक्षा की जाए। साथ ही नए निर्माण कार्य के दौरान स्वतंत्र तकनीकी निगरानी और गुणवत्ता परीक्षण सुनिश्चित किया जाए।
यदि जांच में निर्माण मानकों के उल्लंघन या गुणवत्ता में कमी सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारी तय करने की मांग भी की गई है।
विभाग की निगरानी से तय होगी सड़क की गुणवत्ता
फिलहाल चौढ़ा-पत्थलगांव सड़क को लेकर स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों का जवाब निर्माण कार्य की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी से ही मिलेगा। जरूरत इस बात की है कि निर्माण शुरू होने से पहले ही सभी तकनीकी मानकों को स्पष्ट करते हुए नियमित निरीक्षण कराया जाए, ताकि सड़क लंबे समय तक टिकाऊ और सुरक्षित रह सके।












