बिलासपुर : पत्रकारों को कवरेज से रोकना या धमकाना गंभीर मामला, कानूनी अधिकारों की जानकारी जरूरी

बिलासपुर, 1 अक्टूबर। समाचार संकलन के दौरान पत्रकारों को कई बार अवरोध, धमकी, गाली-गलौज, उपकरण छीनने या नुकसान पहुंचाने जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में पत्रकारों के लिए अपने कानूनी अधिकारों और लागू वैधानिक प्रावधानों की जानकारी रखना जरूरी है।

छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष अमित गौतम ने पत्रकारों की कार्यक्षेत्र से जुड़ी समस्याओं पर चिंता जताते हुए कहा कि पत्रकार जनहित से जुड़े विषयों की जानकारी जुटाने और उसे सामने लाने का काम करते हैं। उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि कवरेज के दौरान किसी तरह की आपराधिक घटना होने पर उसे नजरअंदाज करने के बजाय उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाएं।

BNS के प्रावधानों की जानकारी जरूरी

अमित गौतम ने कहा कि 1 जुलाई 2024 से भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 लागू है, इसलिए पत्रकारों को पुराने IPC प्रावधानों के बजाय वर्तमान कानून में लागू धाराओं की जानकारी रखनी चाहिए।

यदि किसी व्यक्ति को उसकी वैध दिशा में जाने से जानबूझकर रोका जाता है, तो परिस्थितियों के अनुसार BNS की धारा 126 के तहत सदोष अवरोध का मामला बन सकता है। वहीं किसी व्यक्ति को निर्धारित सीमाओं के भीतर रोककर रखने की स्थिति में धारा 127 के प्रावधान लागू हो सकते हैं।

कैमरा या मोबाइल को नुकसान पहुंचाने पर भी कार्रवाई

कवरेज के दौरान पत्रकार के कैमरा, मोबाइल, माइक या अन्य उपकरण को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने की स्थिति में घटना के तथ्यों के आधार पर संपत्ति को नुकसान पहुंचाने अथवा अन्य संबंधित अपराधों के प्रावधान लागू हो सकते हैं।

इसी तरह उपकरण या अन्य सामान जबरन छीनने, नुकसान पहुंचाने अथवा पत्रकार के साथ बल प्रयोग किए जाने की स्थिति में भी घटना की प्रकृति के अनुसार संबंधित कानूनी धाराओं में कार्रवाई हो सकती है।

धमकी और अपमान की स्थिति में कानूनी रास्ता

पत्रकार को खबर प्रकाशित या प्रसारित करने से रोकने के उद्देश्य से धमकी देना भी परिस्थितियों के अनुसार आपराधिक मामला बन सकता है। BNS की धारा 351 आपराधिक धमकी से संबंधित है। इसमें व्यक्ति, उसकी प्रतिष्ठा या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धमकी देने जैसे कृत्य शामिल हैं।

वहीं जानबूझकर अपमान करने या मारपीट की स्थिति में भी घटना के वास्तविक तथ्यों के आधार पर संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई हो सकती है।

घटना होने पर साक्ष्य सुरक्षित रखें

अमित गौतम ने पत्रकारों से कहा कि यदि कवरेज के दौरान कोई अप्रिय या आपराधिक घटना होती है तो शिकायत में घटना का समय, स्थान, संबंधित व्यक्ति, प्रत्यक्षदर्शियों और घटना का पूरा विवरण दर्ज कराना चाहिए।

उन्होंने फोटो-वीडियो, ऑडियो रिकॉर्डिंग, सीसीटीवी फुटेज, क्षतिग्रस्त उपकरण और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की सलाह दी। उनका कहना है कि घटना के वास्तविक तथ्यों के आधार पर ही यह निर्धारित किया जाता है कि कौन-सा कानूनी प्रावधान लागू होगा।

उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर विधिक सलाह भी लें। छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन ने भी पत्रकार साथियों से ऐसी महत्वपूर्ण कानूनी जानकारी को साझा करने की अपील की है, ताकि कार्य के दौरान दबाव, धमकी या अवरोध की स्थिति में वे उचित कानूनी कदम उठा सकें।

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