बीजापुर में 35 लाख के इनामी 6 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण, ओडिशा में सक्रिय थे 4 कैडर
बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सोमवार, 12 अक्टूबर को छह माओवादी कैडरों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस के अनुसार, इन सभी पर कुल 35 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण करने वालों में चार कैडर ओडिशा में सक्रिय थे, जबकि दो पश्चिम बस्तर डिवीजन के संगठन से अलग होकर फरार हो गए थे। इनमें चार पीपीसीएम रैंक के कैडर और दो पार्टी सदस्य शामिल हैं।
चार कैडरों पर था 8-8 लाख रुपये का इनाम
पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वालों की पहचान रानी सोढ़ी उर्फ संध्या, पांडो पोड़ियम उर्फ सस्मिता, सुक्कू कुड़ियम उर्फ संतोष, कोसा माड़वी उर्फ सतीश, देवे मड़कम उर्फ जन्नी और लालू ताती के रूप में हुई है।
इनमें रानी सोढ़ी, पांडो पोड़ियम, सुक्कू कुड़ियम और कोसा माड़वी पर 8-8 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वहीं, देवे मड़कम पर 2 लाख रुपये और लालू ताती पर 1 लाख रुपये का इनाम था। इस तरह सभी छह कैडरों पर कुल 35 लाख रुपये का इनाम था।
2012 से संगठन में सक्रिय थी रानी सोढ़ी
पुलिस के अनुसार, रानी सोढ़ी उर्फ संध्या वर्ष 2012 से माओवादी संगठन में सक्रिय थी। उसने बाल संघम सदस्य के रूप में शुरुआत की और बाद में पीएलजीए सदस्य तथा पार्टी सदस्य के तौर पर काम किया। वर्ष 2022 में उसे पीपीसीएम की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वह ओडिशा राज्य की कंपनी नंबर 8 में सक्रिय रही।
सुरक्षा अभियानों और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर छोड़ा संगठन
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों ने सुरक्षा बलों के बढ़ते प्रभाव, माओवादी संगठन के कमजोर होते ढांचे, हिंसक विचारधारा से मोहभंग और पूर्व माओवादियों के पुनर्वास से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
इस कार्रवाई में जिला रिजर्व गार्ड (DRG) बीजापुर, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 170वीं बटालियन और बीजापुर पुलिस के बीच समन्वय की भूमिका रही।
पुनर्वास के तहत मिलेंगी सुविधाएं
राज्य शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों को नियमानुसार आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा और स्वरोजगार या रोजगार से जुड़ी सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई है। इन सुविधाओं का उद्देश्य उन्हें हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन शुरू करने और समाज की मुख्यधारा में लौटने में मदद करना है।
