पान पानी पालगी के नाम से प्रसिद्ध नगरी सारंगढ़ के श्री राधाकृष्ण हॉस्पिटल की एक और उपलब्धि एक्टोपिक इमरजेंसी में बचाई गर्भवती महिला की जान


सारंगढ़ बिलाईगढ़ –

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श्री राधा कृष्ण हॉस्पिटल सारंगढ़ में एक ऐसा इमरजेंसी ऑपरेशन जो समय पर इलाज ना मिलने पर होती है जानलेवा जो 24×7 महानगरों में ही हो पाता था जिसे ऑक्टोपिक प्रेगनेंसी ( अस्थानिक गर्भावस्था) कहा जाता है को यहां इमरजेंसी में संभव गया ।
श्री राधाकृष्ण हॉस्पिटल के सोनोलॉजिस्ट डॉक्टर डीडी साहू जी को एक महिला के सोनोग्राफी के दौरान इस एक्टोपिक प्रेगनेंसी का पता चला जो हजारों महिलाओं में से किसी 1 को होता है। जिसका पता चलते ही अगर उस महिला का तत्काल इलाज नहीं किया जाता तो उस महिला की जान जाने का ख़तरा होता है तथा इलाज में देरी होने की स्थिति में हालात बिगड़ जाती है l
स्थिति को ध्यान में रखते हुए बिना पल गवाए हॉस्पिटल के सोनोलॉजिस्ट चिकित्सक डॉ डीडी साहू जी ने तत्काल हॉस्पिटल के गायनेकोलॉजिस्ट डॉ माधवी कारेमोरे जी से मीटिंग कर महिला की स्थिति के बारे में अवगत कराया, फिर डॉक्टर की एक टीम तैयार करके उस महिला तथा उसके अस्थानिक गर्भावस्था के दौरान पल रहे बच्चे को यह दुर्लभ ऑपरेशन करके सफलतापूर्वक मरीज़ की जान बचा ली गई।
आइये जानते हैं श्री राधाकृष्ण हॉस्पिटल के गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर माधवी एस कारेमोरे जी से कि एक्टोपिक प्रेगनेंसी(अस्थानिक गर्भावस्था) क्या और कैसे होती है।

डॉ माधवी जी का कहना है कि प्रेगनेंसी के दौरान कई बार भ्रूण का विकास महिलाओं के यूट्रस यानी बच्चादानी में ना होकर इसके बाहरी हिस्से में होने लगता है इसे ही अस्थानिक गर्भावस्था कहते हैं यह अवस्था खतरनाक होती है

एक्टोपिक प्रेगनेंसी के लक्षण निम्न है :-

  1. महिला को गर्भावस्था के शुरुआत में ही पेट दर्द से पेल्विक एरिया में थोड़ा बहुत खिंचाव और दर्द होना।
    2 .जैसे-जैसे भ्रूण का विकास और आकार बढ़ने लगता है।
  2. दबाव बढ़ने या फैलोपियन ट्यूब में फैलाओ की वजह से पेट में दर्द और ब्लीडिंग होने लगती है।
    4 .कंधे और कमर में दर्द।
    5.पेल्विक एरिया में ऐठन।।

ये 5 इसके मुख्य लक्षण है तथा इसको रूटीन गर्भावस्था के प्रारंभिक सोनोग्राफ़ी के दौरान पता किया जाता है।
संस्था के सोनोग्राफी विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ दिनदयाल साहू ने बताया कि प्रेग्नेंसी टेस्ट पॉजिटिव आते ही हो जाए सतर्क तथा सोनोग्राफी कराकर सही और सुरक्षित गर्भावस्था की जानकारी लेकर आश्वस्त हो जाना चाहिए।
प्रेगनेंसी के 5 सप्ताह के बाद पेट में दर्द या ब्लीडिंग को नजर अंदाज़ ना करें तथा किसी भी तरह की परेशानी हो तुरंत दुबारा सोनोग्राफी कराना चाहिए और गर्भावस्था कि जानकारी लेनी चाहिए।
संस्था के संचालक डॉ निधु साहू ने बताया की हमने पिछले ६ सालों में इस क्षेत्र में सुरक्षित मातृत्व के लिए काफ़ी प्रयास किया है तथा अभी तक हज़ारों महिलाओं को आकस्मिक प्रसव सुविधा प्रदान कर जच्चा बच्चा की जान बचाई गई है गर्भावस्था के दौरान हमारे हॉस्पिटल के चिकित्सक से सलाह लें, तथा समयानुशार कंसल्ट करते रहें ताकि इमरजेंसी कंडीशन से बचा जा सके ।

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