बेमेतरा में वेस्ट टू वेल्थ की मिसाल: अलसी के डंठल से बनेगा लिनेन, किसानों की आय बढ़ेगी, महिलाओं को मिलेगा रोजगार

*अब कचरा नहीं, कमाई है अलसी का डंठल – बेमेतरा में लिनेन निर्माण इकाई से बदलेगी किसानों की तकदीर*

 बेमेतरा, 13 अक्टूबर 2026/ जिले में अब अलसी का डंठल बेकार नहीं रहा। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIOR), हैदराबाद के संयुक्त तत्वावधान में रेवेंद्र सिंह वर्मा कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बेमेतरा में संचालित वेस्ट टू वेल्थ कार्यक्रम के तहत स्थापित लिनेन निर्माण इकाई अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था का नया मॉडल बन रही है।

सोमवार को ICAR-IIOR, हैदराबाद के निदेशक डॉ. आर. के. माथुर, प्रधान वैज्ञानिक एवं नोडल अधिकारी डॉ. सी. सुरेश और IGKV रायपुर के नोडल अधिकारी डॉ. संजय द्विवेदी ने इस इकाई का अवलोकन किया। वैज्ञानिकों ने अलसी के डंठल से रेशा निकालकर लिनेन वस्त्र और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार करने की पूरी प्रक्रिया देखी।

अवलोकन के दौरान कृषि अवशेषों के मूल्य संवर्धन, किसानों के लिए अतिरिक्त आय और महिला स्व-सहायता समूहों को स्वरोजगार से जोड़ने पर विस्तृत चर्चा हुई।

डॉ. आर. के. माथुर ने कहा कि कृषि अवशेषों का वैज्ञानिक और व्यावसायिक उपयोग वेस्ट टू वेल्थ की अवधारणा को जमीन पर उतार रहा है। यह न केवल किसानों की आय बढ़ाने का जरिया है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन का भी प्रभावी माध्यम बनेगा।

डॉ. सी. सुरेश ने इसे कृषि आधारित नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि इस तकनीक से महिला समूहों को रेशा निकालने, प्रसंस्करण और उत्पाद निर्माण से जोड़कर स्थानीय स्तर पर रोजगार के बड़े अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. अनूप कुमार सिंह के मार्गदर्शन में संचालित इस पहल का मुख्य उद्देश्य जिले में अलसी की खेती को बढ़ावा देना और किसानों को फसल अवशेषों के आर्थिक महत्व से अवगत कराकर कृषि उद्यमिता को प्रोत्साहित करना है।

इस अवसर पर डॉ. यू.के. ध्रुव, डॉ. टी.डी. साहू, डॉ. साक्षी बजाज सहित परियोजना के तकनीकी स्टाफ मौजूद रहे।

Back to top button