महासमुंद गैस घोटाले में बड़ा खुलासा, खाद्य अधिकारी समेत 4 आरोपी गिरफ्तार

महासमुंद, 10 मई 2026: महासमुंद जिले में जब्त एलपीजी गैस कैप्सूल ट्रकों से करोड़ों रुपये की गैस गायब होने के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव को कथित गैस गबन सिंडिकेट का मास्टरमाइंड बताया गया है।

पुलिस के अनुसार करीब डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य की गैस का गबन किया गया। मामले में अब तक 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दो आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।


जब्त गैस कैप्सूल से शुरू हुई साजिश

पुलिस के मुताबिक दिसंबर 2025 में सिंघोड़ा थाना क्षेत्र में 6 एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रक जब्त किए गए थे। गर्मी और सुरक्षा कारणों से इन्हें सुरक्षित स्थान पर रखने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग को दी गई थी।

जांच में सामने आया कि इसी दौरान गैस गबन की कथित योजना बनाई गई। 23 मार्च 2026 को आरंग के एक ढाबे में बैठक हुई, जिसमें जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव और गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर सहित अन्य लोग शामिल हुए।


3 दिन में खाली कर दिए गए गैस कैप्सूल

पुलिस के अनुसार 30 मार्च 2026 को सुपुर्दनामा मिलने के बाद गैस कैप्सूल ट्रकों को अभनपुर स्थित प्लांट ले जाया गया। इसके बाद अलग-अलग तारीखों में गैस निकालने की प्रक्रिया शुरू हुई।

जांच में दावा किया गया है कि 3 दिनों के भीतर करीब 92 टन गैस खाली कर विभिन्न टैंकरों और एजेंसियों में ट्रांसफर कर दी गई।


वजन कराने में देरी से बढ़ा शक

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि सुपुर्दनामा के बाद ट्रकों का वजन तुरंत नहीं कराया गया। 200 किलोमीटर लंबे रास्ते में कई धर्मकांटे होने के बावजूद वजन नहीं कराया गया।

पुलिस का कहना है कि यह देरी जानबूझकर की गई ताकि पहले गैस निकाली जा सके।


रिकॉर्ड में सामने आई अनियमितता

दस्तावेजों की जांच में पुलिस को कथित कालाबाजारी के संकेत मिले हैं। रिकॉर्ड के अनुसार अप्रैल महीने में ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स ने 47 टन एलपीजी खरीदी, जबकि बिक्री 107 टन दिखाई गई।

जांच में यह भी सामने आया कि कई जगहों पर बिना पक्के बिल के गैस सप्लाई की गई थी।


पुलिस को गुमराह करने की साजिश का आरोप

महासमुंद पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने जांच को भटकाने और पुलिस पर आरोप डालने की रणनीति भी बनाई थी। पूछताछ शुरू होने के बाद कई दस्तावेजों से छेड़छाड़ और रिकॉर्ड हटाने की बात भी सामने आई है।


15 दिन की जांच के बाद खुलासा

महासमुंद पुलिस की विशेष टीम ने 15 दिनों तक कॉल डिटेल रिकॉर्ड, तकनीकी विश्लेषण और दस्तावेजों की जांच के बाद पूरे मामले का खुलासा किया।

तकनीकी रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि किसी भी गैस कैप्सूल में लीकेज नहीं था और प्राकृतिक रूप से इतनी गैस खत्म होना संभव नहीं था।


मामले में आगे की जांच जारी

फिलहाल पुलिस ने अजय यादव, पंकज चंद्राकर और मनीष चौधरी सहित कुल 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। फरार आरोपियों की तलाश जारी है। मामले में बीएनएस और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।

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