रायगढ़ : जंगल में फंसा लकड़ी से भरा माजदा, वन विभाग ने पहुंचकर किया जब्त; आम-महुआ की लकड़ी मिलने का दावा
औरानारा के कक्ष क्रमांक 525 में कार्रवाई, चालक-परिचालक से पूछताछ के आधार पर दर्ज की गई POR
रायगढ़। धरमजयगढ़ वन मंडल के छाल वन परिक्षेत्र के औरानारा जंगल में वन विभाग ने लकड़ी से लदे एक माजदा वाहन को जब्त किया है। विभाग के अनुसार वाहन में आम और महुआ की हरी लकड़ियां लदी मिली हैं। वाहन जंगल के भीतर तकनीकी खराबी के कारण फंस गया था, जिसके बाद वन अमले ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की।
जंगल के भीतर फंसा मिला वाहन
जानकारी के अनुसार औरानारा जंगल के कक्ष क्रमांक 525 में लकड़ी से लदा माजदा वाहन काफी देर तक फंसा रहा। वाहन में तकनीकी समस्या आने के कारण उसे जंगल से बाहर निकालना संभव नहीं हो सका।
इसी दौरान वन विभाग को वाहन के जंगल में फंसे होने की सूचना मिली। टीम मौके पर पहुंची तो वाहन में बड़ी मात्रा में आम और महुआ की लकड़ी लदी हुई मिली।
हरी लकड़ियों के परिवहन की जांच शुरू
वन विभाग ने जब्त लकड़ी के संबंध में उसकी वैधता और परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर लकड़ी को जंगल क्षेत्र से काटकर परिवहन किए जाने की आशंका जताई गई है।
हालांकि लकड़ी वास्तव में कहां से काटी गई और उसके परिवहन के लिए आवश्यक अनुमति या दस्तावेज मौजूद थे या नहीं, इसका अंतिम निष्कर्ष विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
चालक-परिचालक के बयान के आधार पर कार्रवाई
मामले में वाहन के चालक और परिचालक से पूछताछ की गई है। उनके बयानों के आधार पर वन विभाग ने प्राइमरी ऑफेंस रिपोर्ट (POR) दर्ज की है।
इसके अलावा मौके पर मौजूद ग्रामीणों की उपस्थिति में पंचनामा तैयार किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। अब विभाग लकड़ी के स्रोत और परिवहन से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रहा है।
वाहन के राजसात की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में
वन विभाग द्वारा जब्त माजदा वाहन के संबंध में भी नियमानुसार कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। जांच में वन अपराध प्रमाणित होने की स्थिति में वाहन को राजसात करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
फिलहाल विभाग ने वाहन और लकड़ी को अपने कब्जे में लेकर मामले की आगे की जांच शुरू कर दी है।
वाहन मालिक को लेकर भी उठे सवाल
वन विभाग के एक अधिकारी के अनुसार जब्त वाहन को छाल क्षेत्र के विजय अग्रवाल से जुड़ा बताया गया है। अधिकारी के मुताबिक पूछताछ के दौरान वाहन और लकड़ी के परिवहन को लेकर उनसे जानकारी ली गई।
अधिकारी का कहना है कि इस दौरान विजय अग्रवाल ने आम और महुआ की लकड़ी के परिवहन के लिए किसी तरह की परिवहन अनुमति आवश्यक नहीं होने की बात कही। हालांकि इस दावे की वैधता और मामले में उनकी वास्तविक भूमिका भी विभागीय जांच का विषय है।
कहां से काटी गई लकड़ी, अब इसकी होगी पड़ताल
वन विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि वाहन में मिली आम और महुआ की लकड़ी जंगल के किस हिस्से से काटी गई थी। साथ ही लकड़ी को कहां ले जाया जा रहा था और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे, इसकी भी जांच की जा रही है।
मामले में दस्तावेजों, वाहन और संबंधित व्यक्तियों के बयानों को जांच का आधार बनाया जा रहा है।
रेंजर बोले- वैधता की जांच जारी
छाल रेंज के रेंजर आर.के. चौहान ने कहा कि जब्त की गई लकड़ी की वैधता की जांच की जा रही है। प्रकरण में सामने आने वाले वास्तविक तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।












