
रायगढ़ में अवैध कोयला कारोबार पर कार्रवाई सुस्त, प्रशासनिक सख्ती पर उठ रहे सवाल
रायगढ़। जिले में अवैध कोयला उत्खनन और परिवहन को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। लंबे समय से इस कारोबार के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आने से प्रशासनिक सक्रियता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के मुताबिक जिले में आखिरी बार कब बड़े स्तर पर अवैध कोयला कारोबार के खिलाफ कार्रवाई हुई, इसका स्पष्ट रिकॉर्ड भी पुलिस विभाग के पास तत्काल उपलब्ध नहीं बताया जा रहा है। ऐसे में लोगों के बीच यह चर्चा है कि क्या कोल माफियाओं पर वास्तव में लगाम लग चुकी है या फिर अवैध कारोबार अब भी पहले की तरह जारी है।
कई क्षेत्रों में सक्रिय बताए जा रहे नेटवर्क
स्थानीय सूत्रों के अनुसार जिले के छाल, बरौद, घरघोड़ा, धरमजयगढ़ और तमनार क्षेत्र में अब भी अवैध कोयला कारोबार सक्रिय है। कहीं अवैध उत्खनन तो कहीं बिना अनुमति परिवहन और वाहनों के नंबर बदलकर संचालन किए जाने की बातें सामने आती रही हैं।
इसके अलावा निम्न गुणवत्ता वाले कोयले को उच्च ग्रेड बताकर परिवहन किए जाने की शिकायतें भी समय-समय पर विभागीय स्तर तक पहुंचती रही हैं। हालांकि हाल के महीनों में बड़े स्तर की कार्रवाई सामने नहीं आने से लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं।
खनिज विभाग ने दी कार्रवाई की जानकारी
खनिज विभाग के अधिकारियों के अनुसार 2 फरवरी 2026 को धरमजयगढ़ क्षेत्र के ग्राम बोरो में अवैध कोयला उत्खनन के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की गई थी। इस दौरान खनिज अधिनियम के तहत एक मशीन जब्त की गई थी और मौके से बड़ी मात्रा में कोयला बरामद हुआ था।
बताया गया कि कार्रवाई पुलिस, वन विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम द्वारा घने जंगल क्षेत्र में की गई थी। बरामद कोयला और मशीन को आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस को सौंपा गया था।
लोग पूछ रहे — कार्रवाई जमीन पर है या कागजों में?
जिले में लगातार अवैध कोयला कारोबार की चर्चाओं के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि संबंधित विभागों की कार्रवाई आखिर धीमी क्यों पड़ गई है। आम लोगों का कहना है कि यदि कारोबार पूरी तरह बंद हो चुका है तो इसकी स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए, और यदि अब भी गतिविधियां जारी हैं तो फिर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।
जिले में अवैध खनन और परिवहन को लेकर प्रशासन की सक्रियता पर अब लोगों की नजर बनी हुई है।


