रायगढ़ में परिवहन सुविधा केंद्रों का बड़ा खेल? लाइसेंस से लेकर निरीक्षण तक नियमों पर सवाल, अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका भी घेरे में
रायगढ़। रायगढ़ जिले में संचालित परिवहन सुविधा केंद्र एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। जिले में करीब 25 से 30 परिवहन सुविधा केंद्र संचालित हैं, जिनमें से कुछ के विरुद्ध पहले भी अनियमितताओं के चलते परिवहन विभाग कार्रवाई करते हुए उनकी आईडी बंद कर चुका है। इसके बावजूद सूत्रों का दावा है कि जिले के कुछ सुविधा केंद्र आज भी विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से नियमों को ताक पर रखकर काम कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, चारपहिया वाहन चलाने का अनुभव और योग्यता नहीं रखने वाले लोगों के भी ड्राइविंग लाइसेंस आसानी से जारी किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, जिन आवेदकों के पास स्वयं चारपहिया वाहन तक नहीं है, उनके भी लाइसेंस बनने की चर्चा है। वहीं, भारी वाहन (एचएमवी) लाइसेंस के नवीनीकरण में भी बिना निर्धारित परीक्षण और आवश्यक जांच के रिन्यूअल किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
सूत्रों का यह भी कहना है कि कुछ परिवहन सुविधा केंद्रों के माध्यम से राज्य के बाहर रहने वाले लोगों के भी लाइसेंस तैयार किए जा रहे हैं। इसके लिए उन्हें किरोड़ीमल नगर सहित जिले के अन्य स्थानीय पते दर्शाकर दस्तावेज तैयार किए जाने की बात सामने आ रही है। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो यह न केवल परिवहन व्यवस्था बल्कि सरकारी दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
निरीक्षण का अधिकार किसके पास
मामला केवल लाइसेंस तक सीमित नहीं है। सूत्रों का दावा है कि जिन परिवहन सुविधा केंद्रों को वाहन निरीक्षण करने का अधिकार नहीं है, वहीं से निरीक्षण संबंधी प्रक्रिया भी पूरी कराई जा रही है। जबकि नियमानुसार वाहन निरीक्षण का कार्य परिवहन विभाग के अधिकृत मोटरयान निरीक्षक या सक्षम अधिकारी द्वारा किया जाना चाहिए। यदि यह सही है तो यह सीधे-सीधे नियमों के उल्लंघन का मामला बनता है।
नाबालिगों के हाथों में लाइसेंस?
शहर में बड़ी संख्या में नाबालिग छात्र-छात्राएं दोपहिया वाहन चलाते देखे जा सकते हैं। कई बार यातायात जांच के दौरान उनके पास ड्राइविंग लाइसेंस भी पाए जाने की बातें सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों ने लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क दुर्घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी के बीच यह विषय और भी गंभीर हो जाता है।
पुलिस की कार्रवाई से बढ़ी हलचल
हाल ही में शहर के दो परिवहन सुविधा केंद्रों पर पुलिस ने छापेमार कार्रवाई कर बड़ी मात्रा में दस्तावेज जब्त किए थे। पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के विपरीत कार्य करने के आरोप में संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की। इस कार्रवाई के बाद जिले के अन्य परिवहन सुविधा केंद्रों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
जवाब का इंतजार
यदि सूत्रों द्वारा लगाए जा रहे आरोप सही हैं तो सवाल यह उठता है कि आखिर परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है? क्या विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और सुविधा केंद्र संचालकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी कुछ दिनों की चर्चा बनकर रह जाएगा?



