रायगढ़ : 19 सितंबर को चक्रधर समारोह में सजेगी काव्य संध्या, पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा समेत कई कवि करेंगे प्रस्तुति
हास्य-व्यंग्य से लेकर वीर रस और गीतों तक सजेगी साहित्यिक शाम, ओडिसी नृत्य भी रहेगा आकर्षण
रायगढ़, 9 सितंबर 2026। महाराजा चक्रधर सिंह की कला और सांस्कृतिक विरासत को समर्पित 41वां अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह-2026 इस बार 14 से 23 सितंबर तक रायगढ़ के रामलीला मैदान में आयोजित किया जा रहा है। दस दिनों के इस आयोजन में शास्त्रीय नृत्य, लोककला, पंडवानी, संगीत और साहित्य की विभिन्न विधाओं की प्रस्तुतियां होंगी।
इसी क्रम में 19 सितंबर की रात काव्य संध्या का आयोजन किया जाएगा। इस शाम देश के विभिन्न शहरों से आने वाले कवि हास्य-व्यंग्य, वीर रस और गीतों के जरिए दर्शकों से संवाद करेंगे।
पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा होंगे प्रमुख आकर्षण
काव्य संध्या में पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा की प्रस्तुति प्रमुख आकर्षण रहेगी। अपने हास्य और व्यंग्य के लिए पहचाने जाने वाले सुरेंद्र शर्मा अपनी रचनाओं के जरिए श्रोताओं का मनोरंजन करेंगे।
उनके साथ दिल्ली के डॉ. प्रवीण शुक्ला हास्य-व्यंग्य की प्रस्तुति देंगे।
वीर रस और हास्य कविता का भी रंग
काव्य संध्या में लखनऊ की कविता तिवारी वीर रस की कविताओं के जरिए मंच पर अपनी प्रस्तुति देंगी। वहीं रायपुर की शशि सुरेंद्र दुबे और उज्जैन के दिनेश दिग्गज हास्य काव्य से शाम को खास बनाएंगे।
इंदौर के अमन अक्षर गीतों की प्रस्तुति देंगे, जबकि भिलाई के किशोर तिवारी अखिल भारतीय गीतों के माध्यम से श्रोताओं के बीच अपनी रचनाएं प्रस्तुत करेंगे।
19 सितंबर की शाम साहित्य और नृत्य का संगम
कार्यक्रम की जानकारी के अनुसार 19 सितंबर की शाम काव्य के साथ ओडिसी नृत्य की प्रस्तुतियां भी होंगी। गौरी शंकर दाश और रीला होता ओडिसी नृत्य प्रस्तुत करेंगे, जबकि पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा एवं अन्य कवियों की काव्य प्रस्तुतियां साहित्यिक माहौल बनाएंगी।
14 से 23 सितंबर तक कला का महाकुंभ
41वें चक्रधर समारोह में 14 सितंबर से लगातार दस दिनों तक देश और प्रदेश के कलाकार अलग-अलग कला विधाओं का प्रदर्शन करेंगे। कार्यक्रम में शास्त्रीय नृत्य, छत्तीसगढ़ी लोककला, पंडवानी, कबीर भजन, लोकसंगीत, गजल और वाद्य संगीत जैसी विधाओं को स्थान दिया गया है।
समारोह का समापन 23 सितंबर को पद्मश्री कविता कृष्णमूर्ति की प्रस्तुति के साथ होगा।
रायगढ़ में आयोजित होने वाला यह समारोह महाराजा चक्रधर सिंह की कला-साधना और रायगढ़ की सांस्कृतिक परंपरा को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने वाले प्रमुख आयोजनों में शामिल है।












