जबलपुर। कोरोना आपदा मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार पर तीखी टिप्पणी की है. हाईकोर्ट ने सरकार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जैसा हमने आदेश दिया था, वैसा सरकार ने नहीं किया, जिसके चलते निजी अस्पताल जनता को लूट रहे हैं.
मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक ने कहा कि जनता अपने जेवर-जमीन बेचकर निजी अस्पतालों की फीस चुकाने को मजबूर है, जनता को लूटा जा रहा है, जनता का दर्द हमारा दर्द है.
हाईकोर्ट के सवाल पर राज्य सरकार ने कहा कि निजी अस्पतालों की दरें तय करना संभव नहीं है. जिस पर कोर्ट ने सरकार पर कड़ी नाराजगी जताई कि सरकार ने निजी अस्पतालों में इलाज की अधिकतम दरें तय नहीं कीं, और अब सरकार कह रही है कि वो निजी अस्पतालों की दर नियंत्रित नहीं कर सकती है. साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा कि सरकार ने दरें तय करने की बजाए निजी अस्पतालों को छूट दे रखी है.
हाईकोर्ट ने सरकार के जवाब से असंतुष्ट होकर तल्खी दिखाते हुए कहा कि अस्पतालों ने 40 फीसदी दरें बढ़ाने के नाम पर मनमानी दरें बढ़ाईं गई हैं. कोर्ट ने सरकार को अगली तारीख देते हुए कहा कि दरें तय करने पर निर्णय लेकर सरकार जवाब दे. हाईकोर्ट ने इस मामले पर अगली सुनवाई 24 मई को करेगी.