लैलूंगा अस्पताल में धूल फांक रही सोनोग्राफी मशीन, डॉक्टरों की कमी से मरीज परेशान
लैलूंगा।
स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। कुछ समय के लिए सप्ताह में एक-दो दिन सोनोग्राफी विशेषज्ञ की व्यवस्था की गई थी, जिससे मरीजों को राहत मिली थी, लेकिन बाद में यह सुविधा भी बंद हो गई। वर्तमान में अस्पताल में सोनोग्राफी जांच पूरी तरह ठप है।
जांच के लिए लंबी दूरी तय करने की मजबूरी
सोनोग्राफी सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को जांच के लिए रायगढ़ जाना पड़ता है। लैलूंगा से रायगढ़ की दूरी करीब 90 से 95 किलोमीटर है, जबकि दूरस्थ गांवों से आने वाले मरीजों को 150 किलोमीटर तक का सफर तय करना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह अतिरिक्त खर्च और समय दोनों बड़ी समस्या बन गए हैं।
गर्भवती महिलाओं पर सबसे अधिक असर
स्थानीय स्तर पर सोनोग्राफी सुविधा नहीं होने का सबसे अधिक असर गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है। गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच आवश्यक होती है, लेकिन लंबी दूरी और आर्थिक कठिनाइयों के कारण कई बार जांच समय पर नहीं हो पाती। इससे मां और गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की भी कमी
अस्पताल में केवल सोनोग्राफी विशेषज्ञ ही नहीं, बल्कि स्त्री रोग विशेषज्ञ और शिशु रोग विशेषज्ञों की भी कमी बनी हुई है। क्षेत्र की बड़ी आबादी इस अस्पताल पर निर्भर है, लेकिन विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को रायगढ़, अंबिकापुर अथवा निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है।
स्वास्थ्य सुविधाओं पर उठ रहे सवाल
ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के दावों के बीच लैलूंगा अस्पताल की स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है। एक ओर अस्पताल में आवश्यक उपकरण उपलब्ध हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें संचालित करने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। इससे स्वास्थ्य अधोसंरचना का पूरा लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
जल्द समाधान की मांग
क्षेत्रवासियों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने स्वास्थ्य विभाग एवं जिला प्रशासन से लैलूंगा अस्पताल में स्थायी सोनोग्राफी विशेषज्ञ की नियुक्ति करने की मांग की है। साथ ही स्त्री रोग विशेषज्ञ और शिशु रोग विशेषज्ञ की पदस्थापना की भी मांग उठाई गई है, ताकि क्षेत्र की जनता को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े।
अब लोगों की नजर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर है कि इस लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान कब तक हो पाता है।



