विधायक-नायब तहसीलदार विवाद पर हड़ताल जारी, गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदेशभर के राजस्व अधिकारी आंदोलन पर

अंबिकापुर/सरगुजा। सरगुजा जिले के राजापुर उप तहसील में नायब तहसीलदार तुषार मानिक और सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो के बीच हुए विवाद का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। विधायक की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदेशभर के तहसीलदार और नायब तहसीलदार मंगलवार को भी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहे, जिससे राजस्व विभाग का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

राजस्व अधिकारियों के आंदोलन के चलते तहसीलों और उप तहसीलों में नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र सहित कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वहीं सुशासन तिहार के दौरान भी प्रशासनिक कार्यों पर इसका असर देखने को मिल रहा है।

गिरफ्तारी नहीं होने से बढ़ा आक्रोश

कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ का कहना है कि घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। इसी के विरोध में प्रदेशभर के तहसीलदार और नायब तहसीलदार सामूहिक अवकाश और कामबंद आंदोलन पर हैं।

संघ के प्रांत अध्यक्ष कृष्ण कुमार लहरे ने बताया कि राजस्व मंत्री और विभागीय अधिकारियों के साथ हुई चर्चा में कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

नार्को टेस्ट की मांग

मामले में नायब तहसीलदार तुषार मानिक ने कहा है कि पूरे विवाद की सच्चाई सामने लाने के लिए उनका और विधायक रामकुमार टोप्पो दोनों का नार्को टेस्ट कराया जाना चाहिए। उनका कहना है कि इससे आरोपों और प्रत्यारोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

वहीं विधायक रामकुमार टोप्पो ने भी कहा है कि वे जांच में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं और किसी भी प्रकार की जांच प्रक्रिया से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

दोनों पक्षों पर दर्ज है एफआईआर

जानकारी के अनुसार 27 मई को राजापुर उप तहसील में हुए विवाद के बाद नायब तहसीलदार तुषार मानिक की शिकायत पर विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। दूसरी ओर विधायक की बहन की शिकायत पर नायब तहसीलदार के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है।

इस मामले में दोनों पक्ष एक-दूसरे पर अभद्र व्यवहार और मारपीट के आरोप लगा रहे हैं। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

राजस्व कार्यों पर पड़ा असर

हड़ताल के कारण तहसील न्यायालयों में लंबित मामलों की सुनवाई प्रभावित हो रही है। पक्षकारों को नई तारीखें दी जा रही हैं, जबकि सीमांकन और अन्य राजस्व संबंधी कार्य भी ठप पड़े हैं। इससे किसानों और आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

राजस्व निरीक्षक संघ ने भी आंदोलन को समर्थन दिया है, जिससे कई जिलों में राजस्व व्यवस्था प्रभावित हुई है।

राजनीतिक हलकों में भी चर्चा

मामले को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। हालांकि भाजपा संगठन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर कई नेताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

फिलहाल, पूरे मामले पर प्रदेशभर की नजरें टिकी हुई हैं। एक ओर राजस्व अधिकारी गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हुए हैं, वहीं प्रशासन और पुलिस जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं।

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