शिक्षा के नाम पर रायगढ़ जिले में खेला तो नहीं हो रहा है-सुरेन्द्र पाण्डेय

हिंदी माध्यम के स्कूलों मैं शिक्षकों की भारी कमी
रायगढ़ जिले में शिक्षा की दुर्गति हो रही है

रायगढ़ शिक्षा विभाग रायगढ़ द्वारा पहले अंग्रेजी माध्यम के नाम पर जिले के प्रमुख स्कूलों को आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल बनाया गया जिसमें इंटरव्यू के माध्यम से योग्य शिक्षकों के नाम पर ग्रामीण एरिया से इन स्कूलों में प्रतिनियुक्ति दी गई जबकि शासन का स्पष्ट आदेश है की ई संवर्ग में टी संवर्ग के शिक्षकों को पदस्थ नहीं किया जाएगा परंतु अंग्रेजी माध्यम के नाम पर सुदूर क्षेत्र में पदस्थ शिक्षकों को शहरों में लाया गया फिर उन्ही को अनुपयुक्त बोलकर वापस करने का प्रस्ताव भेजा गया है, कौन सी प्रक्रिया सही है कौन से नियमानुसार है किस नियम के तहत हो रहा है कभी भी रायगढ़ शिक्षा विभाग स्पष्ट उत्तर नहीं दे रहा है बगल के जिला जशपुर, सरगुजा,कोरबा,जांजगीर में इस तरीके की जानकारी अभी तक नहीं आई है।
अब छत्तीसगढ़ में रायगढ़ जिला के समस्त हिंदी माध्यम स्कूलों को आत्मानंद में परिवर्तित किया जा रहा है क्या शासकीय शिक्षकों को समिति को सौपना उचित है जब समिति ही स्कूल संचालन करेगी तो समिति के माध्यम से शिक्षकों की भर्ती की जाए शासन के माध्यम से भर्ती हुए शिक्षकों को इतनी बड़ी मात्रा में समिति को क्यों सौंपा जा रहा है।
जिन स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से संचालित हो रहा है स्कूलों के शिक्षकों को पहले हटा दिया गया अब वह भी दूरस्थ इलाकों से शिक्षकों को लाकर क्या खेला हो रहा है कहीं इसके पीछे भी कोई षड्यंत्र तो नहीं है इसकी जांच केंद्रीय समितियों द्वारा होनी चाहिए की योग्य शिक्षकों को पहले हटाया गया उसके पश्चात दूसरे जगह से लाए गए अब पूरे जिले को समिति के माध्यम से संचालित किया जाएगा अगर समिति के माध्यम से ही संचालित होना है तो पहले वहां के हिंदी माध्यम के शिक्षकों को क्यों हटाया गया और अब वहां पर शिक्षकों की कमी हो गई है छात्र छात्राएं अध्यापन में व्यवधान आ रहा है कोई भी स्पष्ट नीति नहीं है परंतु रायगढ़ जिले में ही इतनी तत्परता दिखाई जाती है फिर उसी आदेश को बदला जाता है वह पूरे जिले की में यह व्यवस्था लागू करने के लिए हड़बड़ी मचाई जा रही है क्या एक प्रदेश में अलग-अलग व्यवस्था लागू होंगी जशपुर में अलग रायगढ़ में अलग कोरबा में अलग दंतेवाड़ा में अलग या यहां के अधिकारी बहुत जल्दी में है।
डी एम एफ़ फंड से इन स्कूलों में कार्य कराए जाएंगे तो क्या डी एम एफ फंड शासकीय फंड नहीं है अगर है तो सीधे शासकीय फंड से कराया जाए कहीं पूरे जिले में कार्य कराने के नाम पर तो कोई जल्दी बाजी नहीं की जा रही है इस सारे विषय जनता के मन में प्रश्नवाचक चिन्ह लगा रहे हैं की पहले शिक्षकों को हटाओ उनके स्थान पर दूसरे लाभ फिर संविदा भर्ती करो फिर वहां पर काम करा परंतु शिक्षा का स्तर क्या है इस पर कोई ध्यान नहीं है अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में हिंदी माध्यम के लिए शिक्षकों की कमी हो गई है उसको तत्काल भरने पर तत्परता नहीं दिखाई जा रही है बल्कि दूसरे कामों पर तत्परता दिखाई जा रही है इतने बड़े-बड़े स्कूलों में शिक्षकों की कमी है उसके तरफ शिक्षा विभाग का ध्यान कब जाएगा या वहां भी संविदा में भरने का व्यवस्था तो नहीं बनाई जा रही है इस सारे विषय शिक्षा विभाग में उच्च पदों पर पदस्थ अधिकारियों को बारीकी से देखना चाहिए या केंद्रीय समितियों को जांच करना चाहिए कि कहीं पर कोई गुप्त एजेंडा तो काम नहीं कर रहा है।
नटवर स्कूल में हिंदी माध्यम से शिक्षकों की बहुत कमी हो गई है इसी तरह सारंगढ़ बरमकेला पुसौर खरसिया लैलूंगा धर्मजयगढ़ घरघोड़ा मैं हिंदी माध्यम के शिक्षकों की तत्काल पूर्ति किया जाना चाहिए जिन शिक्षकों को अंग्रेजी माध्यम के नाम पर हटाया गया था उनकी क्या गलती थी और आज फिर जहां भेजे गए हैं वहां भी आत्मानंद खुलने वाला है तो शासन की क्या नीति है स्पष्ट नहीं है उन्हें शिक्षकों को वापस बुलाना न्याय होगा।
इतिहास गवाह है जिन लोगों ने भी शिक्षा के साथ खिलवाड़ किया है जनता उनको भरपूर सबक सिखाइए जोगी सरकार ने सीबीएसई एवं कई तरीके के परिवर्तन का प्रयास किया जो धरातल पर उपयुक्त नहीं था उसका परिणाम जनता ने वोट देकर किया जिसके पश्चात 15 वर्षों तक कांग्रेस की सरकार नहीं आई अब उससे कई गुना ज्यादा बड़ा मजाक शिक्षा के साथ वर्तमान सरकार कर रही है उससे भी ज्यादा रायगढ़ जिला में किया जा रहा है इसका भी परिणाम जनता अवश्य देगी हर गार्जियन अपने बच्चों के भविष्य को बर्बाद नहीं होने देगा और समय पर उसका उत्तर देगा जो सरकार पावर के दम पर इतनी मदमस्त हो गई है की धरातल में शिक्षा कहां जा रही है उस पर ध्यान नहीं है तो अवश्य ही अब जनता को इस पर ध्यान देना पड़ेगा।

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