
बिलासपुर तखतपुर । छत्तीसगढ़ ब्राम्हण विकास परिषद की ओर से गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती के अवसर पर गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में सरगांव से पधारे पंडित अरुण कुमार दुबे रहे ।उन्होंने आख्यान प्रस्तुत करते हुए कहा कि जीवन में यदि वास्तविक जीवन जीना चाहते हैं। तो कैसे जियें यह हम गोस्वामी तुलसीदास जी की रचना पढ़कर ही पा सकते हैं।ईश्वर उन्हें कभी नही मिला जो आस्तिक थे या नास्तिक थे।ईश्वर उन्हें मिला है जो वास्तविक जीवन जीते हैं।आध्यात्मिक जगत और विश्व साहित्य में श्री राम चरित मानस जैसा ग्रंथ कही नही मिलेगा।इसके लिए मानव समाज सदैव इनका ऋणी रहेगा।जीवन मे दुख और सुख दोनों गुलामी है। जिससे हमें सुख मिल रहा है। हम उसके आशक्त हो जाते हैं। जिससे हमें दुख मिल रहा है। हम उसके प्रति द्वेष रखते हैं और यह भी एक प्रकार की गुलामी है, और जो इस जाल में फंसा है। वह कभी ईस्वर को नही पा सकता।ब्यक्ति संसार मे तीन जगह प्रेम करता है पहला ब्यक्ति ,दूसरा वस्तु और तीसरा परमात्मा।ब्यक्ति वस्तु से प्रेम करता है। जबकि वस्तु ब्यक्ति से प्रेम नही करता। अर्थात वस्तु का गुलाम हो गया।पर जब ईश्वर से प्रेम करता है। तो पूरा जीवन सुधर जाता है।ईश्वर फिर ब्यक्ति के पूरे जीवन को सवार देता है।इसलिए मानव जीवन का सार ईश्वर से प्रेम करने में है।समाज की ओर से मोहन वाटिका में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ गोस्वामी तुलसीदास जी और भगवान परशुराम जी की पूजा अर्चना कर किया गया।इस अवसर पर अनिरुद्ध द्विवेदी, संजय शर्मा, दिनेश दुबे,बंशीलाल तिवारी,जनक राम शर्मा,अशोक दुबे,जितेंद्र शुक्ला, अरविंद शर्मा,संतोष गौरहा,सतीश द्विवेदी,प्रदीप तिवारी,कृष्ण कुमार शर्मा,संजीव पांडेय,अरविंद द्विवेदी, अनिल तिवारी, विष्णु मोहन पांडेय, राम शरण पांडेय,किशन पांडेय,संगीता तिवारी, मंजू गौरहा,सुनीता दुबे,माधुरी दुबे,संजू दुबे,प्रतिभा शुक्ला,ओम प्रकाश देवांगन,विजेंद्र तिवारी,अनिल तिवारी,कान्हा पाठक,अभयकांत शर्मा,रोहणी पांडेय,नूतन उपाध्याय, आशा दुबे,शकुंतला शर्मा,अंजू तिवारी,बसंत पांडेय,सी पी दीक्षित, दुर्गा तिवारी,रमा मिश्रा,अजय पांडेय,मिथलेश तिवारी,मणिशंकर पांडेय सहित अन्य उपस्थित रहे।संचालन संजय शर्मा और आभार अनिरुद्ध द्विवेदी ने किया।




