ऐश डाइक में दरार से फैला प्रदूषण, बिजली कंपनी पर 27.60 लाख का पर्यावरणीय जुर्माना
कोरबा। हसदेव ताप विद्युत गृह (पूर्व) के ऐश डाइक (राखड़ डैम) में दरार आने और उससे राखयुक्त पानी के रिसाव से हुए जल प्रदूषण के मामले में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने कड़ी कार्रवाई की है। मंडल ने पर्यावरण को हुए नुकसान के लिए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीजीसीएल) पर 27 लाख 60 हजार रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित की है।
पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय कोरबा द्वारा जारी आदेश के अनुसार ऐश डाइक में दरार आने के कारण बड़ी मात्रा में राख मिश्रित पानी आसपास के क्षेत्रों और प्राकृतिक जल स्रोतों में फैल गया था। इससे जल प्रदूषण की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई और स्थानीय पर्यावरण तथा पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचा।
निरीक्षण में सामने आई गंभीर लापरवाही
मामले की गंभीरता को देखते हुए पर्यावरण संरक्षण मंडल की टीम ने 18 मार्च 2026 को संयंत्र का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान ऐश डाइक से लगातार राखयुक्त पानी के रिसाव और बहाव की पुष्टि हुई। अधिकारियों ने पाया कि प्रदूषण नियंत्रण संबंधी आवश्यक उपाय पर्याप्त नहीं थे, जिसके चलते पर्यावरण को व्यापक क्षति पहुंची।
निरीक्षण के बाद प्रबंधन को जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम तथा वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम के तहत नोटिस जारी कर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद मामले की गंभीरता को देखते हुए पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की कार्रवाई की गई।
पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई के लिए जुर्माना
पर्यावरण संरक्षण मंडल ने स्पष्ट किया है कि यह राशि पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई के उद्देश्य से निर्धारित की गई है। मंडल का मानना है कि औद्योगिक इकाइयों को पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय क्षेत्र में बढ़ी चिंता
ऐश डाइक से राखयुक्त पानी के रिसाव के बाद आसपास के क्षेत्रों में जल स्रोतों के प्रदूषित होने की आशंका जताई गई थी। स्थानीय लोगों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने भी घटना को गंभीर बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
पर्यावरण संरक्षण मंडल ने कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए संयंत्र प्रबंधन को आवश्यक तकनीकी और सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने होंगे। मामले की निगरानी जारी रहेगी और पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन पर आगे भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।



