छत्तीसगढ़ असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती नियमों में 11 साल बाद बड़ा बदलाव: ग्रेजुएशन में 50% अंकों की अनिवार्यता हटेगी, CGPSC की आपत्ति के बाद उच्च शिक्षा विभाग की तैयारी

छत्तीसगढ़ के सरकारी कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। उच्च शिक्षा विभाग आगामी भर्ती नियमों में 11 साल बाद एक बड़ा फेरबदल करने जा रहा है। नए संशोधनों के तहत अब स्नातक (ग्रेजुएशन) में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक होने की अनिवार्य शर्त को हमेशा के लिए हटाया जा सकता है। विभाग ने यह कदम छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) द्वारा दर्ज कराई गई उस कड़ी आपत्ति के बाद उठाया है, जिसमें इस शर्त को यूजीसी (UGC) के नियमों के खिलाफ बताया गया था।

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UGC रेगुलेशन-2018 के अनुरूप नहीं थी शर्त, CGPSC ने लौटाया था प्रस्ताव

उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के शासकीय कॉलेजों में 625 असिस्टेंट प्रोफेसर तथा ग्रंथपाल (लाइब्रेरियन) और क्रीड़ाधिकारी (स्पोर्ट्स ऑफिसर) के 75 पदों पर सीधी भर्ती के लिए सीजीपीएससी को मांग-पत्र (प्रस्ताव) भेजा था। लेकिन आयोग ने इस भर्ती प्रस्ताव का बारीकी से अध्ययन करने के बाद कुल 9 बिंदुओं पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कीं और फाइल को संशोधन के लिए विभाग को वापस लौटा दिया।

आयोग की सबसे प्रमुख आपत्ति नियमों में शामिल ‘अच्छे शैक्षणिक रिकॉर्ड’ की परिभाषा को लेकर थी। प्रस्ताव में स्नातक स्तर पर न्यूनतम 50% अंक अनिवार्य किए गए थे, जबकि सीजीपीएससी का तर्क है कि वर्तमान यूजीसी रेगुलेशन-2018 में ऐसी कोई बाध्यता नहीं है। जब नेट (NET) और सेट (SET) जैसी राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षाओं के लिए भी ग्रेजुएशन में 50% अंकों की कोई शर्त नहीं है, तो भर्ती में इसे लागू रखना पूरी तरह अनुचित है।

2014 और 2019 की भर्तियों में कई योग्य उम्मीदवार रह गए थे वंचित

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में असिस्टेंट प्रोफेसर की पिछली भर्तियां वर्ष 2009, 2014 और 2019 में आयोजित की गई थीं। इनमें से 2014 और 2019 की परीक्षाओं में ग्रेजुएशन में 50% अंक की यह विवादित शर्त लागू रखी गई थी। इसके चलते नेट, सेट और पीएचडी (PhD) जैसी उच्च योग्यता हासिल करने के बावजूद सैकड़ों योग्य और प्रतिभावान अभ्यर्थी केवल स्नातक में कम अंक होने के कारण आवेदन करने से वंचित रह गए थे। विभाग के इस नए कदम से अब ऐसे सैकड़ों अभ्यर्थियों के लिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नौकरी के द्वार खुल जाएंगे।

आपत्तियों के निराकरण के लिए बनी समिति, जल्द जारी होगा विज्ञापन

सीजीपीएससी द्वारा उठाए गए इन 9 तकनीकी और नीतिगत मुद्दों को सुलझाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने एक विशेष समिति का गठन किया है। यह समिति आयोग की सभी आपत्तियों का निराकरण कर जल्द ही एक संशोधित और त्रुटिहीन प्रस्ताव दोबारा सीजीपीएससी को सौंपेगी, जिसके बाद भर्ती का आधिकारिक विज्ञापन जारी होने की पूरी संभावना है।

CGPSC ने इन प्रमुख बिंदुओं पर भी जताई थी आपत्ति:

  • आरक्षण रोस्टर का सही तरीके से संधारण न होना।
  • दिव्यांगता श्रेणी (Reservation Categories for PwD) के विवरण का स्पष्ट न होना।
  • प्रस्ताव के साथ दिव्यांगजन प्रमाण-पत्र का संलग्न न होना।
  • असिस्टेंट प्रोफेसर के सह-विषयों (Allied/Concerned Subjects) की स्पष्टता में कमी।
  • बिना हस्ताक्षर (Unsigned) का आधिकारिक प्रस्ताव भेजना।
  • आयु सीमा में मिलने वाली छूट के नियमों को लेकर भ्रम की स्थिति होना।
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