जनता की नाराज़गी बढ़ाने वाले मुद्दों पर सरकार और प्रशासन को गंभीरता से ध्यान देना होगा
रायगढ़ जिले में विधायक एवं वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के प्रयासों से करोड़ों रुपये की लागत से अनेक विकास कार्य कराए जा रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री विष्णु साय के नेतृत्व में राज्य सरकार भी लगातार नई जनकल्याणकारी योजनाएं लागू कर रही है, ताकि आम जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर हो रही लापरवाही सरकार की छवि को प्रभावित कर रही है।
जिले में पिछले लगभग नौ महीनों से कई विधवा एवं निराश्रित महिलाओं को पेंशन का लाभ नहीं मिल पाया है। इसके अलावा रायगढ़ नगर निगम क्षेत्र में न तो नए राशन कार्ड बनाए जा रहे हैं और न ही पुराने राशन कार्डों का नवीनीकरण किया जा रहा है। जिन लोगों का किसी कारणवश ई-केवाईसी या राशन कार्ड का नवीनीकरण समय पर नहीं हो सका, उनके कार्ड निरस्त कर दिए गए हैं। अब ऐसे नागरिक कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं, जबकि नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार से प्रक्रिया शुरू होने के बाद ही नए राशन कार्ड बनाए जाएंगे।
इस पूरी स्थिति का सबसे अधिक दबाव क्षेत्र के पार्षदों पर पड़ रहा है। जनता सबसे पहले अपने जनप्रतिनिधियों से जवाब मांगती है, लेकिन जब प्रशासनिक स्तर पर ही काम नहीं हो रहा हो तो जनप्रतिनिधियों के लिए भी लोगों को संतुष्ट करना कठिन हो जाता है।
यदि नगर निगम क्षेत्र में राशन कार्ड, विधवा पेंशन और अन्य मूलभूत जनकल्याणकारी योजनाओं का संचालन समय पर नहीं हुआ, तो आम नागरिक अपनी समस्याएं लेकर आखिर किसके पास जाएं? सरकार को यह समझना होगा कि विकास कार्यों के साथ-साथ जनहित की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन भी उतना ही जरूरी है।
विधानसभा चुनाव भी धीरे-धीरे नजदीक आ रहे हैं। ऐसे में यदि जनता की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हुआ, तो इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है। वर्तमान में विधवा पेंशन में देरी, स्मार्ट मीटर को लेकर असंतोष, बिजली बिल में वृद्धि, कैनाल रोड परियोजना के दौरान जोगीडीपा क्षेत्र में बारिश के बीच मकानों को हटाने की कार्रवाई तथा किसानों की विभिन्न समस्याएं जैसे कई मुद्दों को लेकर लोगों में नाराज़गी दिखाई दे रही है।
सरकार और जिला प्रशासन को चाहिए कि इन समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करें, ताकि जनता का विश्वास बना रहे और विकास कार्यों का वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।
राज्य सरकार को यह भी ध्यान रखना होगा कि पूर्व की भूपेश सरकार बिजली बिल में वृद्धि और असमय कटौती जैसी जनसमस्याओं के कारण जनता की नाराज़गी का सामना कर चुकी है। ऐसे में यह स्थिति दोबारा न बने, इसका विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।



