जन्मदिन समारोह विवाद में नया मोड़: अभय बरुआ का दावा- CCTV में लाठी लेकर मारपीट करती दिखीं न्यायाधीश की पत्नी, कार भीड़ में घुसाने वाला साला
दोनों पक्षों की FIR के बाद पुलिस खंगाल रही CCTV फुटेज, मोहल्ले में पहले से तनावपूर्ण माहौल होने की भी सामने आई बात; अभय बोले- घटना के समय मैं घर के भीतर था
अनिल शुक्ला की रिपोर्ट
बिलासपुर। राजकिशोर नगर में 1 नवंबर की रात जन्मदिन समारोह के दौरान हुए विवाद में अब नया मोड़ आ गया है। महासमुंद कुटुंब न्यायालय में पदस्थ न्यायाधीश प्रफुल्ल कुमार सोनवानी, उनकी पत्नी आकांक्षा सोनवानी और उनके रिश्तेदार अभिषेक भारद्वाज से जुड़े इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से FIR दर्ज कराई गई है। अब जन्मदिन समारोह आयोजित करने वाले अभय बरुआ ने सामने आकर अपना पक्ष रखा है। उनका दावा है कि घटनास्थल के CCTV फुटेज में न्यायाधीश की पत्नी हाथ में लाठी लेकर मारपीट करती दिखाई दे रही हैं, जबकि लाल रंग के कपड़े में न्यायाधीश और भीड़ के बीच कार घुसाते हुए अभिषेक भारद्वाज दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि पुलिस की जांच के बाद ही हो सकेगी।
अभय बरुआ बोले- जन्मदिन मना रहे थे, घर के भीतर था मैं
अभय बरुआ ने बताया कि 1 नवंबर को उनका जन्मदिन था। इस अवसर पर उनके मित्र उनके घर पहुंचे थे और घर के भीतर जन्मदिन का कार्यक्रम चल रहा था। कुछ लोग घर के बाहर पटाखे जला रहे थे। इसी दौरान प्रफुल्ल सोनवानी, उनकी पत्नी और उनके रिश्तेदार अभिषेक भारद्वाज घर के बाहर पहुंचे और गाली-गलौज करने लगे।
अभय का कहना है कि जिस समय बाहर विवाद और कथित मारपीट की घटना हो रही थी, उस समय वे अपने घर के भीतर मौजूद थे। उनका दावा है कि उनका किसी से व्यक्तिगत विवाद नहीं था और उन्होंने न तो किसी के साथ मारपीट की और न ही किसी को धमकी दी।
CCTV फुटेज को लेकर अभय ने किए गंभीर दावे
अभय बरुआ ने आरोप लगाया कि घटनास्थल के CCTV फुटेज में न्यायाधीश की पत्नी काले रंग के गाउन में हाथ में लाठी लेकर मारपीट करती दिखाई दे रही हैं। वहीं न्यायाधीश प्रफुल्ल सोनवानी लाल रंग के कपड़ों में नजर आ रहे हैं। अभय का एक अन्य आरोप है कि भीड़ के बीच कार घुसाते हुए दिखाई देने वाला व्यक्ति अभिषेक भारद्वाज है।
इन आरोपों के संबंध में CCTV फुटेज की वास्तविकता, उसमें दिखाई दे रहे व्यक्तियों की पहचान और घटनाक्रम की पुष्टि पुलिस जांच का विषय है। यदि फुटेज में इन दावों की पुष्टि होती है तो मामले की जांच में यह महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकता है।
घर से महज 7-8 मकान दूर है न्यायाधीश का ससुराल
अभय बरुआ ने बताया कि न्यायाधीश प्रफुल्ल सोनवानी का ससुराल उनके घर से महज सात से आठ मकान की दूरी पर है। उनके अनुसार मोहल्ले में पहले से ही कुछ बातों को लेकर असहमति और तनाव की स्थिति रही है।
उन्होंने बताया कि हाल ही में नवरात्रि उत्सव के दौरान चोंगा, माइक और साउंड बॉक्स बजाने को लेकर भी प्रतिबंध लगाने की बात कही जाती थी। इस वजह से मोहल्ले के लोगों के बीच सौहार्द प्रभावित होने की स्थिति बनी थी। अभय के मुताबिक, जन्मदिन समारोह के दौरान हुआ विवाद इसी पृष्ठभूमि में भी देखा जाना चाहिए।
पत्नी की न्यायिक सेवा समाप्ति और पुराने आर्म्स एक्ट मामले की भी चर्चा
इस विवाद के साथ प्रफुल्ल सोनवानी की पत्नी आकांक्षा भारद्वाज का न्यायिक सेवा से जुड़ा पुराना प्रकरण भी चर्चा में है। उनकी न्यायिक सेवा समाप्ति का मामला हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है। इस प्रकरण में सेवा समाप्ति, पुनर्बहाली और दोबारा सेवा समाप्ति से संबंधित अलग-अलग न्यायिक एवं प्रशासनिक आदेश सामने आए हैं। सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले की वर्तमान स्थिति आधिकारिक आदेश से स्पष्ट होना बाकी है।
वहीं अभिषेक भारद्वाज के विरुद्ध जुलाई 2022 में सरकंडा थाना क्षेत्र में आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई होने की जानकारी भी सामने आ चुकी है। पुराने मामले में न्यायालयीन निर्णय की स्थिति अलग से सत्यापित किया जाना जरूरी है।
पुलिस CCTV और मोहल्ले के लोगों के बयान के आधार पर कर रही जांच
इस पूरे मामले में सरकंडा थाना प्रभारी से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि पुलिस घटनास्थल और आसपास लगे CCTV कैमरों के फुटेज की जांच कर रही है। इसके साथ ही आसपास रहने वाले लोगों से भी घटना के संबंध में जानकारी ली जा रही है। दोनों पक्षों की शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब CCTV फुटेज पर टिकी निगाहें
जन्मदिन समारोह से शुरू हुआ यह विवाद अब दो पक्षों की FIR, न्यायिक अधिकारी के परिवार से जुड़े आरोपों और CCTV फुटेज के दावों के बीच पहुंच गया है। एक ओर अभय बरुआ खुद को घटना के समय घर के भीतर मौजूद बता रहे हैं, तो दूसरी ओर उनके विरुद्ध भी शिकायत दर्ज है।
ऐसे में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि CCTV फुटेज में किसकी क्या भूमिका रही, किसने पहले विवाद शुरू किया, क्या वास्तव में लाठी से मारपीट हुई और क्या भीड़ के बीच कार घुसाई गई? इन सवालों का जवाब स्वतंत्र गवाहों, CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों से ही मिल सकेगा।
फिलहाल दोनों पक्षों के आरोपों की जांच जारी है। अब देखना होगा कि पुलिस की जांच में किस पक्ष की भूमिका सामने आती है और क्या न्यायिक तथा प्रशासनिक पदों से जुड़े परिवारों के इस विवाद में सभी के विरुद्ध समान रूप से कानून के अनुसार कार्रवाई होती है।


