जिंदा महिला को रिकॉर्ड में मृत दिखाकर जमीन हड़पने का आरोप, पटवारी एंजेलिना भगत समेत 4 पर FIR; विरोध में पटवारी संघ धरने पर
सूरजपुर, 14 अगस्त 2026। जिले के झिलमिली थाना क्षेत्र में जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। एक जीवित महिला को राजस्व रिकॉर्ड में मृत दर्शाकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर उसकी जमीन का नामांतरण और बाद में जमीन की रजिस्ट्री किए जाने के आरोप में पुलिस ने तत्कालीन तहसीलदार संजय राठौर, पटवारी एंजेलिना भगत समेत चार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। FIR के विरोध में अब पटवारी संघ ने मोर्चा खोल दिया है और झिलमिली थाना परिसर के बाहर धरना शुरू कर दिया है।
पटवारी संघ का कहना है कि मामले में विभागीय जांच चल रही थी और उसके पूरा होने से पहले ही पटवारी के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर दिया गया। संघ ने FIR वापस लेने की मांग की है। वहीं पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच के बाद उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर ही FIR दर्ज की गई है।
क्या है पूरा मामला?
मामला ग्राम कोयलारी/करकोटी क्षेत्र की जमीन से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता शैल कुमारी दुबे के अनुसार उन्होंने वर्ष 1976 में संबंधित भूमि खरीदी थी और वह उसकी वैध स्वामी थीं।
आरोप है कि वर्ष 2024 में फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और कथित रूप से गलत शपथ पत्र के आधार पर शैल कुमारी दुबे को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्शा दिया गया। इसके बाद राजस्व अभिलेखों से उनका नाम हटाकर जमीन का नामांतरण वीरेंद्रनाथ दुबे के नाम किए जाने का आरोप है।
इसके बाद जमीन के एक हिस्से को कमलेश दुबे के नाम दान करने तथा अन्य हिस्सों को शिवम दुबे और संजय कुमार के नाम विक्रय किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस जांच में राजस्व रिकॉर्ड, दस्तावेजों और बयानों के आधार पर प्रथम दृष्टया अनियमितताओं के साक्ष्य मिलने की बात सामने आई है।
जिंदा होने के बावजूद रिकॉर्ड में मृत कैसे हुईं?
मामले की सबसे गंभीर बात यह है कि जिस महिला को दस्तावेजों में मृत बताया गया, वह वास्तव में जीवित थीं। शिकायत सामने आने के बाद अधिकारियों के समक्ष उन्होंने अपनी जमीन और राजस्व रिकॉर्ड में हुए बदलाव को लेकर शिकायत की।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि महिला के जीवित होने से संबंधित आधिकारिक दस्तावेज मौजूद थे। इसके बावजूद रिकॉर्ड में उन्हें मृत दर्शाकर जमीन के नामांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ने का आरोप है।
पटवारी एंजेलिना भगत पर क्यों हुई FIR?
पुलिस ने मामले की जांच के बाद तत्कालीन तहसीलदार संजय राठौर, तत्कालीन पटवारी एंजेलिना भगत समेत चार लोगों को आरोपी बनाया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज किस स्तर पर तैयार हुए और राजस्व रिकॉर्ड में नाम परिवर्तन की प्रक्रिया में किस-किस की भूमिका रही।
पुलिस का कहना है कि FIR किसी एक अधिकारी की शिकायत के आधार पर सीधे नहीं की गई, बल्कि मामले की जांच के बाद सामने आए तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर अपराध दर्ज किया गया है।
FIR के विरोध में पटवारी संघ का धरना
FIR में पटवारी एंजेलिना भगत का नाम आने के बाद सूरजपुर पटवारी संघ ने विरोध शुरू कर दिया। संघ के जिला अध्यक्ष राजेश साहू का कहना है कि यह मूल रूप से जमीन और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़ा मामला है, जिसकी विभागीय जांच चल रही थी। उनका आरोप है कि विभागीय जांच पूरी होने और दोष तय होने से पहले ही पुलिस ने FIR दर्ज कर दी।
पटवारी संघ ने FIR वापस लेने की मांग करते हुए झिलमिली थाना परिसर के बाहर धरना शुरू किया है। संघ ने मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन जारी रखने की बात कही है।
पुलिस का क्या कहना है?
मामले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार देवांगन ने कहा कि वर्ष 2024 में महिला की ओर से शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत में उसे मृत दर्शाकर उसकी जमीन का नामांतरण किए जाने का आरोप लगाया गया था। पुलिस के अनुसार जांच के बाद ही तत्कालीन तहसीलदार, पटवारी समेत चार लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है।
पुलिस ने यह भी कहा है कि विवेचना अभी जारी है और जांच के दौरान जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब दो पक्षों के दावों पर टिकी नजर
एक तरफ पुलिस का दावा है कि दस्तावेजों और प्रारंभिक जांच में अपराध के प्रथमदृष्टया पर्याप्त आधार मिलने के बाद FIR दर्ज की गई है। दूसरी ओर पटवारी संघ का कहना है कि विभागीय जांच पूरी होने से पहले आपराधिक कार्रवाई करना उचित नहीं है।
ऐसे में अब पुलिस की विवेचना और विभागीय जांच से यह स्पष्ट होगा कि फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र किसने तैयार कराया, राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव किस स्तर पर हुआ और जमीन के नामांतरण एवं बाद की रजिस्ट्री में किन लोगों की भूमिका थी। मामले में आरोप अभी जांच के अधीन हैं।







