
रायगढ़। जिले में बिजली विभाग के एक सेवानिवृत्त अधिकारी से डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर 36 लाख 97 हजार 117 रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित की शिकायत पर साइबर थाना पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, पीड़ित जनवरी 2022 में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत प्रेषण कंपनी से परिवेक्षक पद से सेवानिवृत्त हुए थे। 14 जनवरी 2026 को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात महिला का कॉल आया। महिला ने स्वयं को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) से जुड़ा बताते हुए कहा कि उनके पहचान पत्र का दुरुपयोग कर जियो कंपनी का मोबाइल नंबर लेकर अवैध गतिविधियां की जा रही हैं।
पीड़ित द्वारा इंकार करने पर कॉल को कथित टेलीकॉम अधिकारी और दिल्ली के बाराखंबा रोड पुलिस स्टेशन के फर्जी अधिकारियों से जोड़ दिया गया। ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दी। इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने वीडियो कॉल कर खुद को आईपीएस अधिकारी नीरज ठाकुर बताया और डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया।
ठगों ने जांच के नाम पर पीड़ित से बैंक खाते, संपत्ति और अन्य वित्तीय जानकारी हासिल की और कहा कि सत्यापन के लिए रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करनी होगी, जिसे बाद में लौटा दिया जाएगा।
अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए रुपए
धमकी और दबाव में आकर पीड़ित ने 30 जनवरी से 11 फरवरी 2026 के बीच कुल 36,97,117 रुपये विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। घटना के बाद वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगे। परिजनों को जानकारी मिलने पर ठगी का खुलासा हुआ और साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई गई।
साइबर पुलिस ने 2 लाख रुपये होल्ड कराए
शिकायत मिलते ही साइबर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लगभग 2 लाख रुपये होल्ड करा दिए। साइबर थाना प्रभारी नासिर खान ने बताया कि यदि पीड़ित तुरंत शिकायत दर्ज कराते या नेशनल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करते, तो अधिक राशि बचाई जा सकती थी।
एसएसपी की अपील—सरकारी एजेंसियां डिजिटल अरेस्ट नहीं करतीं
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह ने स्पष्ट किया कि पुलिस, सीबीआई, ईडी या कोई भी सरकारी एजेंसी मोबाइल कॉल, वीडियो कॉल या सोशल मीडिया के माध्यम से किसी को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती और न ही जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश देती है।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे फर्जी कॉल से सतर्क रहें, अपनी बैंकिंग जानकारी साझा न करें और किसी भी संदेह की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराएं।




