धान के खेत में ‘सफेद जहर’ का हमला: रायगढ़ में फ्लाई ऐश डंपिंग से उठे गंभीर सवाल

रायगढ़। जिले के घरघोड़ा ब्लॉक के टेड़ा नावपारा में कृषि भूमि पर फ्लाई ऐश डंपिंग का मामला सामने आने के बाद प्रशासन और पर्यावरण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस जमीन पर कुछ समय पहले तक धान की फसल लहलहा रही थी, अब उसी खेत को औद्योगिक कचरा डालने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।


उपजाऊ जमीन पर डंपिंग, किसान की भूमिका पर सवाल

जानकारी के अनुसार, स्थानीय किसान सनत कुमार राठिया की भूमि पर शारदा एनर्जी एंड मिनरल्स बिंजकोट द्वारा फ्लाई ऐश डंपिंग की जा रही है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या किसान ने स्वेच्छा से अपनी जमीन दी है या उस पर किसी प्रकार का दबाव बनाया गया है।


विधानसभा में भी उठा था मुद्दा

हाल ही में विधानसभा में विपक्ष ने इस मामले को उठाते हुए पर्यावरण विभाग की निष्क्रियता पर सवाल खड़े किए थे। विधायक उमेश पटेल ने आरोप लगाया था कि विभाग न तो सही जानकारी दे रहा है और न ही प्रभावी कार्रवाई कर रहा है।

वहीं सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया था कि कृषि और वन भूमि पर फ्लाई ऐश डंपिंग नियमों के खिलाफ है और इसे किसी भी स्थिति में अनुमति नहीं दी जाएगी।


नियमों के विपरीत हो रही डंपिंग

नियमानुसार फ्लाई ऐश का निपटान केवल लो-लाइंग क्षेत्रों या खदानों में किया जाना चाहिए, लेकिन यहां उपजाऊ खेतों में डंपिंग की जा रही है, जो नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है।


पर्यावरण और स्वास्थ्य पर खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार फ्लाई ऐश में मौजूद भारी धातुएं मिट्टी की उर्वरता को नुकसान पहुंचाती हैं और भूजल को भी प्रदूषित कर सकती हैं। इससे लंबे समय में कृषि उत्पादन और मानव स्वास्थ्य दोनों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।


प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि भूमि का निरीक्षण किया गया है या नहीं और डंपिंग की अनुमति किस आधार पर दी गई।


यदि समय रहते इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई, तो क्षेत्र की उपजाऊ जमीन बंजर में तब्दील हो सकती है और किसानों की आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। अब नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है।

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