पटाखा बाजार के संचालन पर नगर पालिका अध्यक्ष ने उठाए सवाल, एसडीएम के आदेश को बताया अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप
40 दुकानों से नगर पालिका को मिलने वाले राजस्व पर उठाए सवाल, टेंट में दुकानें लगाने और अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप; जांच और कार्रवाई की मांग
अनिल शुक्ला की रिपोर्ट | रतनपुर
रतनपुर में दीपावली पर्व के मद्देनजर लगाए गए पटाखा बाजार को लेकर अब प्रशासनिक अधिकारों और सुरक्षा व्यवस्था पर विवाद खड़ा हो गया है। नगर पालिका परिषद रतनपुर के अध्यक्ष लवकुश कश्यप ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कोटा द्वारा पटाखा दुकानों के संचालन के लिए जारी कार्यादेश पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे नगर पालिका के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप बताया है। उनका आरोप है कि नगर पालिका क्षेत्र के भीतर लगने वाली पटाखा दुकानों की अनुमति, एनओसी और व्यवस्थापन का अधिकार नगर पालिका से जुड़ा है। इसके बावजूद एसडीएम कार्यालय द्वारा सीधे कार्यादेश जारी कर लगभग 40 दुकानों के संचालन की व्यवस्था कराई गई, जिससे नगर पालिका के अधिकारों के साथ उसके राजस्व हितों को भी नुकसान पहुंचा है।
नगर पालिका अध्यक्ष लवकुश कश्यप का कहना है कि जिला मुख्यालय से जारी निर्देशों के अनुसार नगर पालिका क्षेत्र में पटाखा बाजार की एनओसी और दुकानों के व्यवस्थापन की प्रक्रिया नगर पालिका के माध्यम से होनी चाहिए। इससे नगर पालिका को राजस्व भी प्राप्त होता है। लेकिन इस बार अनुविभागीय अधिकारी कोटा द्वारा सीधे कार्यादेश जारी कर दुकानों को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी दी गई। उनका सवाल है कि जब नगर पालिका क्षेत्र में बाजार संचालित हो रहा है और उससे निकाय को राजस्व प्राप्त होना है, तो नगर पालिका को विश्वास में लिए बिना यह प्रक्रिया कैसे पूरी कर दी गई? इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए और राजस्व की संभावित क्षति का जवाब भी तय होना चाहिए।
एसडीएम के आदेश में महामाया मंदिर ट्रस्ट की पार्किंग का उल्लेख
गौरतलब है कि अनुविभागीय दण्डाधिकारी कोटा द्वारा 6 नवंबर 2026 को ज्ञापन क्रमांक 1855/स्टेनो/अ.वि.अ./2026 जारी किया गया था। यह आदेश पटाखा व्यापारी संघ रतनपुर के 26 अक्टूबर 2026 के आवेदन के संदर्भ में जारी हुआ।
व्यापारियों ने धान खरीदी के कारण मंडी प्रांगण में जगह उपलब्ध नहीं होने का हवाला देते हुए महामाया मंदिर ट्रस्ट के पार्किंग ग्राउंड में पटाखा दुकानें लगाने के लिए स्थान आवंटित करने की मांग की थी। इसके बाद तहसीलदार रतनपुर और थाना प्रभारी रतनपुर से संयुक्त जांच कराई गई। जांच प्रतिवेदन में संबंधित भूमि को महामाया मंदिर ट्रस्ट के नाम दर्ज तथा मौके पर रिक्त बताया गया। साथ ही ट्रस्ट द्वारा 30 अक्टूबर 2026 को अनापत्ति एवं सहमति दिए जाने का उल्लेख किया गया।
आदेश में यह भी उल्लेख है कि धान मंडी परिसर में नगर पालिका के डंपिंग यार्ड के कारण गंदगी और बदबू की स्थिति है तथा 15 नवंबर से धान खरीदी की तैयारी की जा रही है। इन परिस्थितियों को देखते हुए एसडीएम ने महामाया मंदिर ट्रस्ट की पार्किंग ग्राउंड की भूमि पर वर्ष 2026 के लिए अस्थायी रूप से पटाखा दुकान संचालन की सशर्त अनुमति प्रदान की तथा नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी को आवश्यक व्यवस्था और सहयोग करने के निर्देश दिए।


टेंट में दुकानें लगाने पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप
नगर पालिका अध्यक्ष ने पटाखा बाजार में अग्नि सुरक्षा के निर्धारित मानकों के पालन पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पटाखा दुकानों के संचालन के लिए जारी दिशा-निर्देशों में स्पष्ट रूप से ज्वलनशील सामग्री से दुकानें बनाने के बजाय अज्वलनशील टिन शेड के उपयोग की बात कही गई है, लेकिन मौके पर टेंट लगाकर दुकानें संचालित की जा रही हैं। यदि यह स्थिति सही है तो यह सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही का विषय है।
निर्धारित सुरक्षा दिशा-निर्देशों के अनुसार पटाखा दुकानें रिहायशी क्षेत्रों और बाजारों के पास नहीं होनी चाहिए। दुकानों के बीच कम से कम तीन मीटर की दूरी होनी चाहिए तथा दुकानें एक-दूसरे के आमने-सामने नहीं बनाई जानी चाहिए। किसी भी पटाखा दुकान के 50 मीटर के दायरे में आतिशबाजी का प्रदर्शन प्रतिबंधित है।
प्रत्येक दुकान में पांच किलोग्राम क्षमता का डीसीपी अग्निशामक यंत्र रखना अनिवार्य है। इसके अलावा दुकान के अंदर और बाहर अलग-अलग 100-100 लीटर पानी की व्यवस्था होनी चाहिए। अग्निशमन वाहन के आवागमन के लिए कम से कम छह मीटर चौड़ा रास्ता खुला रखना और दुकानों के सामने बाइक एवं कार की पार्किंग प्रतिबंधित रखना भी आवश्यक है।
विद्युत सुरक्षा को लेकर भी स्पष्ट निर्देश हैं। दुकानों में तेल या गैस के लैम्प तथा खुली बिजली बत्ती का उपयोग नहीं होना चाहिए। बिजली के तारों के जोड़ खुले नहीं होने चाहिए और प्रत्येक मास्टर स्विच में फ्यूज अथवा सर्किट ब्रेकर की व्यवस्था होनी चाहिए। दुकानें ट्रांसफार्मर के पास नहीं होनी चाहिए तथा उनके ऊपर से हाईटेंशन विद्युत लाइन नहीं गुजरनी चाहिए।
चार-पांच दिन से बाजार संचालित, नगर पालिका को पत्र देर से मिलने पर नाराजगी
नगर पालिका अध्यक्ष लवकुश कश्यप ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि पटाखा बाजार का संचालन पिछले चार से पांच दिनों से हो रहा है, जबकि एसडीएम कार्यालय का कार्यादेश नगर पालिका को एक दिन पहले ही प्राप्त हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बाजार पहले से संचालित हो रहा था तो संबंधित निकाय को समय रहते जानकारी और आदेश क्यों नहीं दिया गया?
उनका कहना है कि क्या नगर पालिका के जनप्रतिनिधि केवल आदेश मिलने पर ‘जी मैडम’ कहने के लिए बैठे हैं? नगर पालिका के अधिकार क्षेत्र, राजस्व और जवाबदेही का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। यदि बाजार के संचालन के दौरान कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि ऐसी किसी भी स्थिति में वे अनुविभागीय अधिकारी कोटा को पत्र लिखकर जवाबदेही और कार्रवाई की मांग करेंगे।
जांच के लिए प्रशासन को लिखा जाएगा पत्र
नगर पालिका अध्यक्ष ने पटाखा बाजार में मौके पर दिखाई दे रही अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि दीपावली जैसे बड़े पर्व पर आम जनता की सुरक्षा सर्वोपरि है। पटाखा बाजार में सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसलिए प्रशासन को तत्काल स्थल का निरीक्षण कराना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी दुकानदार निर्धारित नियमों का पालन करें।
अब सवाल यह है कि नगर पालिका के अधिकार क्षेत्र और राजस्व से जुड़े विवाद का प्रशासन किस तरह निराकरण करता है? साथ ही, एसडीएम के आदेश में अग्निशमन व्यवस्था, विद्युत सुरक्षा और अन्य आवश्यक सावधानियों का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देशों के बावजूद यदि मौके पर टेंट में दुकानें संचालित हो रही हैं, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? दीपावली के दौरान किसी अप्रिय घटना की नौबत आने से पहले प्रशासनिक स्तर पर इन सवालों का जवाब और सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक जांच जरूरी है।























































