पीडीएस में मिलेगा बेहतर गुणवत्ता वाला चावल, नई योजना लागू करने की तैयारी तेज

छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत मिलने वाले राशन चावल की गुणवत्ता में जल्द सुधार देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार की नई “इम्प्रूव्ड राइस स्कीम” को आगामी खरीफ विपणन सीजन से लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत हितग्राहियों को पहले की तुलना में अधिक गुणवत्तायुक्त चावल उपलब्ध कराया जाएगा।

खड़े चावल की मात्रा बढ़ेगी

नई नीति के अनुसार अब पीडीएस चावल में 90 प्रतिशत खड़ा चावल और केवल 10 प्रतिशत कनकी (टूटा चावल) की अनुमति होगी। वर्तमान व्यवस्था में 75 प्रतिशत खड़ा चावल और 25 प्रतिशत कनकी शामिल रहती है। इससे राशन दुकानों के माध्यम से वितरित होने वाले चावल की गुणवत्ता बेहतर होगी।

राइस मिलों को करना होगा तकनीकी उन्नयन

नए मानकों को पूरा करने के लिए प्रदेश की राइस मिलों को आधुनिक मशीनों और उन्नत तकनीक से लैस करना होगा। सरकार का मानना है कि इससे बेहतर गुणवत्ता वाला चावल तैयार किया जा सकेगा और उपभोक्ताओं को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

कनकी का होगा अलग उपयोग

नई व्यवस्था में बचने वाले अतिरिक्त 15 प्रतिशत ब्रोकन राइस (कनकी) को अलग रखा जाएगा। इसके लिए अलग से टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी और इसे एथेनॉल उत्पादन इकाइयों को उपलब्ध कराया जाएगा। इससे कनकी का बेहतर उपयोग होने के साथ मिलर्स को अतिरिक्त आर्थिक अवसर भी मिल सकते हैं।

82 लाख से अधिक हितग्राहियों को मिलेगा लाभ

छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 82.42 लाख राशन कार्डधारी पीडीएस योजना का लाभ ले रहे हैं। राज्य में हर वर्ष लगभग 25 लाख मीट्रिक टन चावल का वितरण किया जाता है। नई योजना लागू होने पर बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण राशन उपलब्ध होने की उम्मीद है।

एआई आधारित होगा पीडीएस सिस्टम

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि यह पहल खाद्य सुरक्षा और पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली को तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम बनाने के लिए ‘सार्थक पीडीएस योजना फेज-2’ के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग किया जाएगा। राशन वितरण से लेकर परिवहन और निगरानी तक कई प्रक्रियाओं को डिजिटल और स्मार्ट बनाया जाएगा।

राइस मिलर्स ने बताई चुनौतियां

राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष कांतिलाल बोथरा ने कहा कि योजना का उद्देश्य अच्छा है, लेकिन इसे लागू करने में तकनीकी और व्यावहारिक चुनौतियां भी हैं। प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसी राइस मिलें हैं, जहां अभी आधुनिक मशीनें उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मिलर्स की समस्याओं और सुझावों को सरकार तक पहुंचाया जाएगा।

मिलर्स से मांगे गए सुझाव

खाद्य सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने बताया कि केंद्र सरकार इस योजना को प्राथमिकता के आधार पर लागू करने की दिशा में काम कर रही है। राइस मिल संचालकों से सुझाव और सुझावों के आधार पर प्रस्ताव तैयार कर भारत सरकार को भेजे जाएंगे, ताकि योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।

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