रायगढ़ : केलो नदी में जहर घोल रहा शिव शक्ति स्टील प्लांट, बाउंड्री के बाहर बहता काला पानी, ETP भी बंद; आखिर कब सुधरेगा प्लांट का रवैया?
सरपंच की शिकायत पर निरीक्षण में सामने आई गंभीर स्थिति, परिसर में जलभराव से ओवरफ्लो होकर बाहर जा रहा दूषित पानी; बार-बार शिकायत और कार्रवाई के बावजूद वही हालात, प्रबंधन को फिर मिला 10 दिन का समय।
रायगढ़। जिले की जीवनदायिनी केलो नदी की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शिव शक्ति स्टील प्लांट रायगढ़ से निकलने वाले काले पानी को लेकर शिकायत सामने आई है।
शिकायत पर हुए स्थल निरीक्षण में उद्योग परिसर से काला पानी बाउंड्री वॉल के बाहर बहता हुआ पाया गया। वही, नाले के मुहाने के समीप भी काला पानी मिलता हुआ मिला। सबसे गंभीर बात यह रही कि निरीक्षण के दौरान उद्योग में अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र (ETP) का संचालन नहीं पाया गया। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर औद्योगिक अपशिष्ट पानी का उपचार किस व्यवस्था के तहत किया जा रहा है?
मिली जानकारी के अनुसार, शिव शक्ति स्टील प्लांट द्वारा काला पानी केलो नदी में छोड़े जाने की शिकायत रविशंकर (सरपंच) ने व्हाट्सऐप के माध्यम से की थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए निरीक्षण अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान उद्योग परिसर से काला पानी बाउंड्री वॉल के बाहर बहकर जाता हुआ पाया गया। साथ ही नाले के मुहाने के समीप भी काला पानी मिलता हुआ मिला।
ETP बंद, तो दूषित पानी का उपचार कैसे?
निरीक्षण के दौरान उद्योग में ETP (Effluent Treatment Plant) यानी अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र का संचालन नहीं पाया गया। किसी भी औद्योगिक इकाई से निकलने वाले दूषित पानी को उपचारित करने के लिए ETP महत्वपूर्ण व्यवस्था होती है। ऐसे में इसका संचालन नहीं मिलना उद्योग की अपशिष्ट जल प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर जब उपचार संयंत्र ही संचालित नहीं पाया गया, तो उद्योग से निकलने वाले दूषित पानी को किस तरह नियंत्रित और उपचारित किया जा रहा है?
परिसर में तालाबनुमा जलभराव, ओवरफ्लो होकर बाहर जा रहा पानी
निरीक्षण में उद्योग परिसर के भीतर तालाबनुमा जलभराव की स्थिति भी सामने आई। इसके कारण ओवरफ्लो का पानी बाउंड्री वॉल के बाहर बहता हुआ पाया गया। यह स्थिति आसपास के क्षेत्र और जलस्रोतों के लिए चिंता का विषय है। यदि औद्योगिक अपशिष्ट पानी का समुचित उपचार और सुरक्षित निस्तारण नहीं किया गया, तो इसका पर्यावरण और जलीय पारिस्थितिकी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
बार-बार शिकायत, कार्रवाई और फिर वही कहानी! आखिर कब सुधरेगा प्लांट?
शिव शक्ति स्टील प्लांट को लेकर यह कोई पहली शिकायत नहीं है। प्लांट की गतिविधियों और पर्यावरणीय नियमों के पालन को लेकर पहले भी शिकायतें और कार्रवाई की स्थिति सामने आती रही है। लेकिन बार-बार शिकायत, निरीक्षण और विभागीय कार्रवाई के बाद भी यदि एक बार फिर उद्योग परिसर से काला पानी बाहर बहता मिलता है और ETP का संचालन नहीं पाया जाता, तो यह पूरी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है।
आखिर हर बार शिकायत के बाद निरीक्षण और निर्देश जारी होने के बावजूद ऐसी स्थिति दोबारा क्यों बनती है? क्या विभागीय कार्रवाई केवल नोटिस और निर्देशों तक सीमित रह जाती है? यदि पहले भी कार्रवाई हुई है, तो उसका परिणाम क्या निकला? क्या उद्योग प्रबंधन ने पूर्व में दिए गए निर्देशों का पालन किया या फिर कुछ समय बाद वही स्थिति दोबारा बन गई?
अब सवाल सिर्फ एक शिकायत या निरीक्षण का नहीं, बल्कि केलो नदी और आसपास के पर्यावरण की सुरक्षा का है। उद्योगों की गतिविधियों का खामियाजा स्थानीय नागरिकों, किसानों और आने वाली पीढ़ियों को नहीं भुगतना पड़े, इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की भी है।
10 दिन का अल्टीमेटम, अब कागजी कार्रवाई नहीं ठोस कार्रवाई की जरूरत
निरीक्षण के बाद उद्योग प्रतिनिधि को तत्काल उचित समाधान की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने तथा 10 दिनों के भीतर कार्यालय में इसकी जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या इस बार भी मामला केवल निर्देश जारी करने तक सिमटकर रह जाएगा या विभाग मौके पर जाकर यह सुनिश्चित करेगा कि दूषित पानी का बहाव पूरी तरह रोका गया है और ETP का विधिवत संचालन हो रहा है?
केलो नदी रायगढ़ की प्रमुख नदियों में से एक है। इसका संरक्षण केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। ऐसे में औद्योगिक इकाइयों की लापरवाही या अपशिष्ट जल प्रबंधन में किसी भी तरह की कमी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अब जनता जानना चाहती है कि आखिर कब तक शिकायत, निरीक्षण और कार्रवाई का यह सिलसिला चलता रहेगा? क्या शिव शक्ति स्टील प्लांट के मामले में इस बार कोई स्थायी समाधान निकलेगा या फिर 10 दिन बाद एक बार फिर वही कहानी दोहराई जाएगी? केलो नदी की सुरक्षा के लिए अब केवल आश्वासन नहीं, जमीन पर ठोस कार्रवाई की जरूरत है।





