बिलासपुर: बाल देखभाल संस्थाओं से किशोरों के फरार होने की घटनाओं पर हाईकोर्ट सख्त; केंद्र सरकार से मांगा जवाब, 25 अगस्त को अगली सुनवाई
बिलासपुर, 12 अगस्त। छत्तीसगढ़ में बाल देखभाल संस्थाओं (Observation Homes/Shelter Homes) से किशोरों के फरार होने की गंभीर घटनाओं को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बेहद संज्ञान में लिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने इस मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार को आवश्यक पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है और केंद्रीय गृह मंत्रालय से राज्य को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के संबंध में जवाब तलब किया है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला महासमुंद के सरकारी ऑब्जर्वेशन होम से 8 किशोरों और बिलासपुर की बाल देखभाल संस्था से 4 किशोरों के अचानक फरार हो जाने की घटनाओं से जुड़ा हुआ है। इस तरह की लगातार घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे, जिसके मद्देनजर राज्य सरकार ने प्रदेश की कुल 26 बाल देखभाल संस्थाओं में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए 156 सिक्योरिटी गार्ड तैनात करने का प्रस्ताव तैयार किया है।
हाईकोर्ट के निर्देश और वित्तीय सहायता का मुद्दा
- राज्य सरकार का प्रस्ताव: राज्य सरकार ने गत 8 अगस्त को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को पत्र भेजकर इन 156 सुरक्षा गार्डों की तैनाती के एवज में सालाना करीब 4.68 करोड़ रुपये के बजट की मांग की है।
- कोर्ट का रुख: मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के सचिव को निर्देश दिया है कि वे शपथपत्र (Affidavit) दाखिल कर यह स्पष्ट करें कि केंद्र सरकार की योजनाओं या दिशा-निर्देशों के तहत इन सुरक्षा गार्डों की तैनाती के लिए छत्तीसगढ़ राज्य को किस प्रकार वित्तीय सहायता प्रदान की जा सकती है।
- अगली सुनवाई: डिवीजन बेंच ने हाईकोर्ट रजिस्ट्री को केंद्र सरकार को इस मामले में पक्षकार बनाने का आदेश दिया है। अब इस महत्वपूर्ण जनहित याचिका/मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है।



