महिला आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम के विरोध में कांग्रेस का तीखा हमला=योगिता साहू


बेमेतरा =महिला आरक्षण के महत्वपूर्ण मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा लगातार देशभर में भ्रम और गलत जानकारी फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। कांग्रेस नेत्री योगिता साहू ने इस विषय पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपा अपने झूठ को स्थापित करने के लिए अपने पूरे सरकारी और संगठनात्मक संसाधनों का दुरुपयोग कर रही है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में महिला आरक्षण विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित होकर कानून का रूप ले चुका है। इसके बावजूद आज तक इसे लागू नहीं किया जाना यह दर्शाता है कि केंद्र सरकार की मंशा महिलाओं को वास्तविक अधिकार देने की नहीं है, बल्कि केवल राजनीतिक लाभ लेने की है।

योगिता साहू ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री, केंद्र एवं राज्य सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक, एमएलसी, पार्टी संगठन के पदाधिकारी और तथाकथित ‘गोदी मीडिया’ तक—सभी मिलकर सुनियोजित तरीके से यह झूठ फैलाने में लगे हुए हैं कि महिला आरक्षण बिल गिर गया था या कांग्रेस ने इसे पास नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि यह न केवल तथ्यहीन है, बल्कि लोकतंत्र और जनता के साथ सीधा छल है।

उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि पढ़े-लिखे और कानून की समझ रखने वाले लोग भी इस तरह की भ्रामक जानकारी को आगे बढ़ा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, पूरा विपक्ष एकजुट होकर भाजपा के इन झूठों को उजागर कर रहा है और सोशल मीडिया सहित विभिन्न माध्यमों से सही और तथ्यात्मक जानकारी जनता तक पहुंचा रहा है।

योगिता साहू ने स्पष्ट किया कि यदि 543 लोकसभा सीटों पर महिला आरक्षण लागू किया जाता है, तो स्वाभाविक रूप से कई वर्तमान पुरुष जनप्रतिनिधियों को अपनी सीट छोड़नी पड़ेगी।
• कांग्रेस सहित पूरा विपक्ष इस बदलाव के लिए पूरी तरह तैयार और प्रतिबद्ध है।
• लेकिन केंद्र की मोदी सरकार की नीयत इस दिशा में साफ नहीं दिखती।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने महिलाओं को 33% आरक्षण देने का कानून तो पारित कर दिया, लेकिन उसे लागू करने में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इसके उलट, इस देरी और निष्क्रियता का दोष विपक्षी दलों पर डालने का प्रयास किया जा रहा है, जो पूरी तरह भ्रामक और राजनीतिक रूप से प्रेरित है।

योगिता साहू ने व्यंग्य करते हुए कहा—
“मानो मेरे पास टोकरी में 543 आम हैं, लेकिन मैं महिलाओं को तभी दूँगी जब ये 850 हो जाएंगे!”
यानी अधिकार आज नहीं, बल्कि किसी अनिश्चित भविष्य के नाम पर टाल दिया गया है। यही भाजपा के महिला आरक्षण का वास्तविक चेहरा है।

उन्होंने आगे कहा कि भाजपा की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। एक ओर वह महिलाओं के सशक्तिकरण की बात करती है, वहीं दूसरी ओर उनके अधिकारों को लागू करने में जानबूझकर देरी कर रही है। यह महिलाओं के साथ अन्याय और उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति उदासीनता का स्पष्ट उदाहरण है।

अंत में योगिता साहू ने देश के सभी नागरिकों, विशेषकर महिलाओं से अपील की कि वे इस सच्चाई को समझें और किसी भी भ्रामक प्रचार से प्रभावित न हों। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान, अधिकार और राजनीतिक भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता और एकजुटता बेहद आवश्यक है।

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