रायगढ़ जिला जेल में बंदी की मौत मामले में बड़ी कार्रवाई: दो पुलिसकर्मी लाइन अटैच, उच्च स्तरीय न्यायिक जांच के आदेश
रायगढ़ जिला जेल में बंद एक विचाराधीन कैदी (अंडर ट्रायल बंदी) की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के हाई-प्रोफाइल मामले में जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने बेहद सख्त कदम उठाया है।
शनिवार को जेल में तबीयत बिगड़ने के बाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दम तोड़ने वाले कैदी की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए **दो पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच** कर दिया गया है। इसके साथ ही, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शासन द्वारा **उच्च स्तरीय न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) के आदेश** भी जारी कर दिए गए हैं। इससे पूर्व, मौत की खबर मिलते ही आक्रोशित परिजनों और सैकड़ों ग्रामीणों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया था।
अवैध शराब केस में बंद था मृतक, परिजनों का गंभीर आरोप— ‘जेल में बेरहमी से पीटा गया’
मिली जानकारी के अनुसार, कोतरारोड थाना क्षेत्र के ग्राम नवापारा निवासी संजय बघेल (उम्र 28 वर्ष) को पुलिस ने अवैध शराब बेचने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। शनिवार की सुबह जेल के भीतर अचानक उसकी हालत बिगड़ी, जिसके बाद जेल प्रबंधन ने उसे तत्काल आपातकालीन एम्बुलेंस से रायगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया। दोपहर में इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही मृतक के गृह ग्राम से बड़ी संख्या में ग्रामीण और रिश्तेदार अस्पताल पहुंच गए। परिजनों का सीधा आरोप है कि संजय पूरी तरह स्वस्थ था और जेल के भीतर उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई है, जिसके चलते उसकी जान गई। इसके अतिरिक्त, ग्रामीणों ने इस बात पर भी गहरा रोष व्यक्त किया कि मौत के कई घंटों बाद तक स्थानीय प्रशासन ने उन्हें शव देखने या पहचान करने की अनुमति नहीं दी, जिससे उनका शक और गहरा गया और पुलिस व ग्रामीणों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति निर्मित हो गई थी।
पिता और सरपंच के बयानों ने कोतरारोड पुलिस की कार्यप्रणाली को घेरा
मामले में मृतक संजय के पिता प्यारे लाल बघेल ने कोतरारोड पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर उंगली उठाई है। उन्होंने बताया कि ३ दिन पहले गांव में एक सामाजिक कार्यक्रम चल रहा था, जिसमें उनका बेटा शामिल होने गया था। उसी दौरान शंभू चौहान नाम के एक पुलिसकर्मी ने संजय और एक अन्य युवक को हिरासत में लिया था। पिता का आरोप है कि पुलिस ने दूसरे युवक से सांठगांठ (पैसा लेकर) कर उसे छोड़ दिया, जबकि उनके बेटे को झूठे केस में फंसाकर जेल भेज दिया।
वहीं, नवापारा के सरपंच नंद कुमार बरेठ ने अस्पताल परिसर में मीडिया को बताया कि कोतरारोड पुलिस ने महज तीन दिन पहले ही संजय बघेल को गिरफ्तार किया था और आज अचानक उसकी मौत की खबर आ गई। शव को छुपाकर रखने और देखने न देने के कारण ही ग्रामीणों का गुस्सा भड़का था।
जेल अधीक्षक की सफाई— ‘अस्वस्थता के कारण हुई मृत्यु, मारपीट का दावा गलत’
दूसरी ओर, जेल प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने परिजनों द्वारा लगाए गए मारपीट और हत्या के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। रायगढ़ जेल अधीक्षक श्री जीएस सोरी ने आधिकारिक पक्ष रखते हुए बताया कि विचाराधीन कैदी संजय बघेल को 10 जून को जेल में दाखिल कराया गया था। इसके बाद 12 जून को उसने शारीरिक अस्वस्थता की शिकायत की, जिस पर तत्काल जेल के आंतरिक अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा उसका प्राथमिक उपचार किया गया था।
शनिवार सुबह जब उसके स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं दिखा, तो उसे तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने सघन परीक्षण कर दवाइयां दीं, परंतु इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में वीडियोग्राफी के साथ होगा पोस्टमार्टम, समझाइश के बाद शांत हुए ग्रामीण
अस्पताल में कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति को देखते हुए जिले के वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने आक्रोशित ग्रामीणों और रोते-बिलखते परिजनों को ढांढस बंधाया और निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिया। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि चूंकि यह मामला कस्टडी (जेल के भीतर) में मौत का है, इसलिए नियमानुसार मजिस्ट्रेट की प्रत्यक्ष मौजूदगी और पूरी वीडियोग्राफी के तहत ही पंचनामा व पोस्टमार्टम की आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
प्रशासनिक आश्वासन, दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच करने और न्यायिक जांच के त्वरित आदेश जारी होने के बाद ही ग्रामीण शांत हुए। पुलिस का कहना है कि मौत के वास्तविक और तकनीकी कारणों का सटीक खुलासा पोस्टमार्टम (PM) रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल मामले में मर्ग कायम कर आगे की सघन विवेचना शुरू कर दी गई है।



