ट्रिपल इंजन की सरकार के तीसरे इंजन के कार्बोरेटर में आया कचरा, आम जनता हो रही परेशान

रायगढ़ नगर निगम चुनाव के दौरान भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा केंद्र, राज्य और नगर निगम में एक ही पार्टी की सरकार होने को लेकर “ट्रिपल इंजन की सरकार” का नारा दिया गया था, जिससे विकास कार्यों में तेजी आने और बेहतर सुविधाएं मिलने का दावा किया गया था। लेकिन शहर की जमीनी हकीकत इन दावों के विपरीत नजर आ रही है, जिसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे इस ‘ट्रिपल इंजन’ के तीसरे यानी स्थानीय निकाय रूपी इंजन के कार्बोरेटर में कचरा फंस गया हो, जिसके कारण मूलभूत सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं और जनता परेशान है.

डेंगू के खतरे के बीच दवाओं की कमी और खराब फॉगिंग मशीनें

बारिश का मौसम शुरू होते ही शहर में पानी जमा होने और गंदगी की समस्या विकराल रूप लेने लगी है। रायगढ़ में हर साल डेंगू का खतरा बना रहता है और बरसात के दिनों में मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ जाता है। ऐसे में मच्छर नियंत्रण के लिए एंटी-लार्वा दवाओं का छिड़काव और फॉगिंग बेहद जरूरी होती है, लेकिन नगर निगम में आवश्यक दवाओं की कमी की बात सामने आ रही है। इसके साथ ही, फॉगिंग करने वाली अधिकांश मशीनें भी खराब बताई जा रही हैं, जिसके कारण वार्डों में नियमित रूप से फॉगिंग नहीं हो पा रही है और आने वाले दिनों में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौती खड़ी हो सकती है।

वार्डों में सफाई कर्मचारियों की भारी कमी

मच्छर नियंत्रण की व्यवस्था के अलावा नगर निगम के वार्डों में सफाई कर्मचारियों की भारी कमी भी एक बड़ा मुद्दा बन गया है। सूत्रों के अनुसार, जिन वार्डों में मानक के अनुसार 6 सफाई कर्मचारियों की स्वीकृत संख्या होनी चाहिए, वहां मैदानी स्तर पर केवल 3 कर्मचारी ही काम कर रहे हैं। कर्मचारियों के इस अभाव का सीधा असर शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ रहा है और जगह-जगह गंदगी के ढेर नजर आ रहे हैं.

जनता के दबाव में बेबस नजर आ रहे पार्षद

वार्डों में व्याप्त गंदगी, फॉगिंग न होने और मच्छरों के प्रकोप से परेशान आम जनता अपनी समस्याओं को लेकर सीधे पार्षदों के पास पहुंच रही है। लेकिन नगर निगम प्रशासन की ओर से पर्याप्त संसाधन और कर्मचारी उपलब्ध न कराए जाने के कारण पार्षद भी पूरी तरह असहाय नजर आ रहे हैं। जनता के लगातार बढ़ते दबाव के चलते जनप्रतिनिधियों की मुश्किलें भी बढ़ती जा रही हैं.

जिम्मेदारों से प्रभावी कार्रवाई की मांग

एक तरफ जहां स्वास्थ्य विभाग मौसमी बीमारियों को लेकर सतर्कता बरतने के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ नगर निगम क्षेत्र की यह लचर व्यवस्था कई गंभीर सवाल खड़े करती है। शहर की जनता अब यह सवाल पूछने लगी है कि व्यवस्थाओं के इस पहिए को कौन दुरुस्त करेगा? नागरिकों और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि नगर निगम प्रशासन को तत्काल इन समस्याओं की सुध लेनी चाहिए, संसाधनों की कमी को दूर करना चाहिए और बारिश के मौसम को देखते हुए शहर में सफाई, फॉगिंग व मच्छर नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने चाहिए ताकि जनता को राहत मिल सके।

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