नेपाल में तबाही के बाद सुरंगों में फंसे 121 कर्मचारियों की तलाश तेज, तीन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बने बचाव का केंद्र

ग्लेशियर ढहने के बाद आई बाढ़ ने हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया, अब जिंदगी की तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन

काठमांडू, 9 सितंबर 2026। नेपाल में 26 अगस्त को ग्लेशियर ढहने के बाद आई विनाशकारी बाढ़ और मलबे की चपेट में आए हाइड्रोपावर प्रोजेक्टों में बचाव अभियान जारी है। सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए नेपाल की सेना और विशेषज्ञ बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं।

अधिकारियों के मुताबिक करीब 900 हाइड्रोपावर कर्मचारी लापता हैं। इनमें से लगभग 121 लोगों के सुरंगों के भीतर फंसे होने की आशंका है। बचाव दल अब विशेष रूप से तीन सुरंगों—चिलिमे, अपर त्रिशूली-3ए और अपर त्रिशूली-3बी—पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

पहले भी मिली है जिंदगी की उम्मीद

रेस्क्यू अभियान में अब तक कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं, जिन्होंने सुरंगों के भीतर फंसे लोगों के जिंदा होने की उम्मीद बढ़ाई है।

अपर त्रिशूली-3ए परियोजना की सुरंग में संजय साह और कबीर महार्जन नौ दिनों तक फंसे रहने के बाद जिंदा बाहर निकाले गए थे। दोनों को सुरंग के भीतर हवा वाले एक हिस्से में शरण मिली थी। इसके बाद एक अन्य हाइड्रोपावर परियोजना से चीनी नागरिक लू हैताओ को भी सुरक्षित बाहर निकाला गया।

मलबे के नीचे दबे हैं सुरंगों के रास्ते

26 अगस्त को ग्लेशियर के एक हिस्से के ढहने के बाद भारी मात्रा में पानी, मिट्टी और चट्टानों ने त्रिशूली घाटी में तबाही मचा दी थी। कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं के प्रवेश मार्ग मलबे से ढक गए और सुरंगों के भीतर मौजूद लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया।

बचाव दल को कई जगह कई मीटर तक जमा मलबे और चट्टानों को हटाकर सुरंगों तक पहुंचना पड़ रहा है। खराब मौसम और बारिश के कारण अभियान में अतिरिक्त चुनौती आ रही है।

विशेष उपकरणों से हो रही तलाश

बचाव दल सुरंगों की स्थिति का पता लगाने के लिए भारी मशीनरी, ड्रिलिंग और नियंत्रित विस्फोट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ स्थानों पर सुरंगों में हवा के खाली हिस्सों की संभावना को देखते हुए बचावकर्मी आवाज और अन्य संकेतों के जरिए अंदर मौजूद लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।

हजारों लोगों के लापता होने से बढ़ी चुनौती

इस आपदा का असर केवल हाइड्रोपावर परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। बाढ़ और भूस्खलन के कारण नेपाल में 1,300 से अधिक लोगों की मौत और हजारों लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। पड़ोसी तिब्बत में भी इस आपदा का असर पड़ा है।

ऐसे हालात में सुरंगों में फंसे कर्मचारियों की तलाश को बचाव अभियान का सबसे संवेदनशील हिस्सा माना जा रहा है। पहले कुछ लोगों को जिंदा निकालने में मिली सफलता के बाद रेस्क्यू टीमों को उम्मीद है कि मलबे के नीचे और लोग भी सुरक्षित मिल सकते हैं।

तीन सुरंगों पर सबसे ज्यादा फोकस

फिलहाल बचाव अभियान का मुख्य केंद्र चिलिमे, अपर त्रिशूली-3ए और अपर त्रिशूली-3बी परियोजनाएं हैं। अधिकारियों और बचाव विशेषज्ञों का मानना है कि सुरंगों में मौजूद हवा के कुछ हिस्से लोगों को लंबे समय तक जीवित रहने में मदद कर सकते हैं।

रेस्क्यू टीमों के सामने चुनौती बड़ी है, लेकिन पहले सफल बचाव अभियानों ने लापता कर्मचारियों के परिवारों में उम्मीद कायम रखी है।

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