रायगढ़ : राज्योत्सव में महिला समूहों के उत्पादों की धूम, 50 हजार रुपये से अधिक की बिक्री
रायगढ़। मिट्टी के दीये, पारंपरिक बर्तन, मसाले, ज्वार का आटा और हस्तनिर्मित आभूषण… छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में इस बार स्थानीय महिला समूहों के उत्पादों ने लोगों का ध्यान खींचा। संत पूज्य श्री प्रियदर्शी राम ऑडिटोरियम में लगाए गए स्व-सहायता समूहों के स्टॉल से 50 हजार रुपये से अधिक के उत्पादों की बिक्री हुई। इस आयोजन ने ग्रामीण महिलाओं को अपने हुनर का प्रदर्शन करने और सीधे ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर दिया।
अलग-अलग समूहों ने सजाए उत्पादों के स्टॉल
बिहान योजना से जुड़ी महिलाओं ने राज्योत्सव में अपनी मेहनत से तैयार किए गए उत्पादों को प्रदर्शित किया। स्टॉल पर मिट्टी के पारंपरिक बर्तन, दीये, ब्रास मेटल की सामग्री, टेराकोटा, मसाले, ज्वार का आटा, कृत्रिम आभूषण और मशरूम से जुड़े उत्पाद उपलब्ध रहे।
जनपद पंचायत पुसौर के बारडोली स्थित सितारा स्व-सहायता समूह ने मिट्टी के दीये, पारंपरिक बर्तन और सजावटी सामग्री का स्टॉल लगाया। समूह ने करीब 9 हजार रुपये के उत्पाद बेचे। वहीं एकताल के सुभद्रा स्व-सहायता समूह ने ब्रास मेटल से बने पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय किया।
मसालों और खाद्य उत्पादों की भी रही मांग
पुसौर महिला उत्पादक कंपनी (एफपीओ) ने मसाले और ज्वार के आटे के उत्पादों का स्टॉल लगाया, जहां लगभग 12 हजार रुपये की बिक्री हुई। बासनपाली के एकता स्व-सहायता समूह ने टेराकोटा सामग्री प्रदर्शित की, जबकि गोपालपुर के सरस्वती स्व-सहायता समूह ने कृत्रिम आभूषण, फूल-पत्ती और मशरूम उत्पादों को बिक्री के लिए रखा।
बासनपाली के उगता सूरज स्व-सहायता समूह के खाद्य सामग्री स्टॉल पर करीब 15 हजार रुपये के उत्पाद बिके। इनके अलावा अन्य महिला समूहों ने भी अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई और बिक्री की।
बाजार मिलने से महिलाओं को मिला प्रोत्साहन
राज्योत्सव में उत्पादों की बिक्री ने महिला समूहों को अपनी तैयार सामग्री के लिए बाजार उपलब्ध कराया। इससे महिलाओं को ग्राहकों की पसंद समझने, उत्पादों की पहचान बनाने और अपने काम को आगे बढ़ाने का अवसर मिला।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए बिहान योजना के माध्यम से प्रयास कर रही है। राज्योत्सव में महिला समूहों की भागीदारी इन प्रयासों के साथ ग्रामीण स्तर पर तैयार हो रहे स्थानीय उत्पादों की संभावनाओं को भी सामने लाती है।


