रायपुर: झीरम घाटी फैसले के बाद सियासत तेज, दीपक बैज ने NIA जांच पर उठाए सवाल; विजय शर्मा ने कांग्रेस से पूछा- 5 साल सरकार में क्या किया?
13 साल पुराने झीरम मामले में 10 आरोपी दोषी, फैसले के बाद कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने
रायपुर। झीरम घाटी हमले के मामले में करीब 13 साल बाद आए NIA की विशेष अदालत के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अदालत ने मामले में 10 आरोपियों को दोषी ठहराया है। फैसले के बाद कांग्रेस ने जांच के दायरे और कथित राजनीतिक षड्यंत्र की जांच को लेकर सवाल उठाए हैं, वहीं भाजपा ने कांग्रेस के पूर्ववर्ती शासनकाल की भूमिका पर पलटवार किया है।
दीपक बैज बोले- पीड़ित परिवारों को अभी पूरी सच्चाई का इंतजार
पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने झीरम मामले में अदालत के फैसले के बाद कहा कि कांग्रेस और पीड़ित परिवारों की अपेक्षा केवल आरोपियों को सजा दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि घटना के पीछे की पूरी सच्चाई सामने आना भी जरूरी है।
बैज ने झीरम हमले को केवल नक्सली हमला मानने के बजाय इसके पीछे राजनीतिक षड्यंत्र की आशंका की जांच किए जाने की मांग दोहराई। उन्होंने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन पहलुओं से घटना की पूरी तस्वीर सामने आ सकती थी, उन पर पर्याप्त जांच नहीं हुई।
NIA जांच के एंगल पर कांग्रेस ने जताई आपत्ति
दीपक बैज का आरोप है कि केंद्र में भाजपा सरकार आने के बाद जांच की दिशा बदल गई। उन्होंने सवाल उठाया कि FIR में जिन बड़े नक्सली नेताओं के नाम सामने आए थे, उनमें से कुछ बाद में आत्मसमर्पण कर चुके हैं, तो उनसे झीरम मामले को लेकर किस स्तर पर पूछताछ हुई।
कांग्रेस की ओर से पहले भी जांच में महत्वपूर्ण लोगों के बयान दर्ज नहीं किए जाने और कथित राजनीतिक साजिश के पहलू की पर्याप्त जांच नहीं होने के आरोप लगाए जाते रहे हैं।
विजय शर्मा का पलटवार- कांग्रेस पांच साल सत्ता में रही, तब क्या किया?
कांग्रेस के आरोपों पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने पलटवार किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, तब झीरम मामले की जांच को आगे बढ़ाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए।
विजय शर्मा ने कहा कि NIA की जांच के आधार पर ही अदालत में मामला चला और अब न्यायालय ने 10 आरोपियों को दोषी ठहराया है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि झीरम मामले की जांच NIA को सौंपे जाने के समय केंद्र में कांग्रेस नेतृत्व वाली UPA सरकार थी।
25 मई 2013 को हुआ था झीरम घाटी हमला
झीरम घाटी हमला 25 मई 2013 को उस समय हुआ था, जब कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला बस्तर के दरभा क्षेत्र से गुजर रहा था। माओवादियों ने काफिले पर हमला किया था, जिसमें कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और अन्य लोगों की मौत हुई थी।
NIA के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार केंद्र सरकार के आदेश के बाद 27 मई 2013 को एजेंसी ने दरभा थाने में दर्ज FIR को अपने हाथ में लेकर जांच शुरू की थी। मामले में IPC, आर्म्स एक्ट, विस्फोटक अधिनियम और UAPA समेत कई धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था।
अदालत के फैसले के बाद राजनीतिक बहस और तेज
झीरम मामले में अदालत का फैसला आने के साथ ही अब राजनीतिक बहस का केंद्र जांच के अगले पहलू पर आ गया है। कांग्रेस जहां कथित राजनीतिक षड्यंत्र की जांच की मांग कर रही है, वहीं भाजपा कांग्रेस के सत्ता में रहने के दौरान इस मामले में की गई कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रही है।
13 साल पुराने इस मामले में अब दोषियों की सजा पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया होगी। ऐसे में अदालत के फैसले के साथ ही झीरम मामले से जुड़े राजनीतिक और जांच संबंधी सवाल एक बार फिर प्रदेश की सियासत के केंद्र में आ गए हैं।
स्रोत: हरिभूमि की मूल रिपोर्ट












