राहुल गांधी की याचिका में मिलीं 14 खामियां, सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को नहीं होगी सुनवाई; ₹220 फीस भी कम

नई दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राहुल गांधी और विपक्षी दलों के 10 अन्य नेताओं की ओर से दाखिल याचिका पर मंगलवार, 13 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका में 14 प्रक्रियागत खामियां बताई हैं। इनमें कोर्ट फीस में 220 रुपये की कमी, दस्तावेजों की अस्पष्ट प्रतियां और कई याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे नहीं होना शामिल है। इन कमियों को दूर किए जाने के बाद ही याचिका सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हो सकेगी।

याचिका में क्या-क्या खामियां मिलीं?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रजिस्ट्री ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की प्रति स्पष्ट नहीं होने पर आपत्ति जताई है। इसके अलावा 11 याचिकाकर्ताओं में से नौ के वकालतनामे गायब या अधूरे पाए गए हैं। वकालतनामा वह दस्तावेज होता है, जिसके जरिए कोई पक्षकार अपने वकील को अदालत में प्रतिनिधित्व करने का अधिकार देता है।

रजिस्ट्री ने कुछ दस्तावेजों की स्पष्ट प्रतियां और चुनाव आयोग से संबंधित रिकॉर्ड भी मांगे हैं। याचिका में शामिल व्यक्तिगत निर्वाचन आयुक्तों को प्रतिवादी बनाए जाने के औचित्य पर भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।

राहुल गांधी समेत 11 विपक्षी नेताओं ने दाखिल की याचिका

राहुल गांधी और विपक्षी दलों के 10 अन्य नेताओं ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। यह कदम मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष के विरोध के बीच उठाया गया।

याचिका में निर्वाचन आयोग के कुछ फैसलों और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में नाम हटाने और संशोधन की प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल हैं। ये आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं; इन पर अदालत का अंतिम निर्णय नहीं आया है।

SIR प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच की मांग

याचिका में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए स्वतंत्र समिति गठित करने और मतदाता सूची में किए गए बदलावों का ऑडिट कराने की मांग की गई है। इसमें समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपने का प्रस्ताव भी शामिल है।

याचिकाकर्ताओं ने जांच पूरी होने तक जारी SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

खामियां दूर होने के बाद आगे बढ़ेगी सुनवाई

याचिका में बताई गई कमियां प्रक्रियागत हैं। इनका उल्लेख होना याचिका में लगाए गए आरोपों पर अदालत का फैसला नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, विपक्षी नेताओं की कानूनी टीम ने कमियां दूर करने के बाद मामले को बुधवार को सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया है।

अब आगे की सुनवाई याचिका में बताई गई खामियों को दूर करने और सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी होने पर निर्भर करेगी।

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