
जॉब वर्क दरों में तत्काल संशोधन नहीं हुआ तो संकट और गहराएगा – CCDA
रायपुर =छत्तीसगढ़ केमिस्ट्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (CCDA) ने केंद्र सरकार को आगाह किया है कि संशोधित शेड्यूल-M (Good Manufacturing Practices) के वर्तमान क्रियान्वयन से देशभर में 6,500 से अधिक फार्मा MSME इकाइयों के बंद होने का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।
एसोसिएशन ने कहा कि दवा गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय मानकों तक ले जाने का उद्देश्य सराहनीय है, लेकिन नीति निर्माण में फार्मा MSME सेक्टर के जॉब वर्क (कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग) मॉडल, जिस पर लगभग 70 प्रतिशत छोटी इकाइयाँ निर्भर हैं, को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।
संशोधित शेड्यूल-M के अनुपालन हेतु MSME इकाइयों को 30 से 50 प्रतिशत तक अतिरिक्त पूंजी एवं परिचालन व्यय वहन करना पड़ रहा है, जबकि ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) के अंतर्गत NPPA द्वारा निर्धारित जॉब वर्क कन्वर्ज़न दरें पिछले 12 वर्षों से लगभग अपरिवर्तित बनी हुई हैं। वर्ष 2013–14 से अब तक महंगाई 65–70 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है, वहीं बिजली, श्रम, कच्चे माल और अनुपालन लागत में भारी वृद्धि हुई है।
उद्योग के आकलन के अनुसार, शेड्यूल-M अनुपालन के लिए प्रति इकाई ₹10–15 करोड़ तक का निवेश आवश्यक है। इसके बावजूद अब तक केवल 21.53 प्रतिशत MSME इकाइयों ने ही अपने अपग्रेडेशन प्लान प्रस्तुत किए हैं। मौजूदा परिस्थितियों में अनुमान है कि करीब 60 प्रतिशत इकाइयाँ वित्तीय रूप से अस्थिर होकर बंद होने को मजबूर हो सकती हैं।
CCDA ने यह भी कहा कि सरकार की RPTUAS और SPI जैसी योजनाएँ पूंजीगत सहायता तक सीमित हैं और बढ़ती परिचालन लागत की कोई प्रभावी भरपाई नहीं करतीं। पहले से बैंक ऋण के बोझ से दबे MSME के लिए अतिरिक्त कर्ज लेना उन्हें डिफॉल्ट, NCLT कार्यवाही और दिवालियापन की ओर धकेल सकता है।
इस संकट के व्यापक दुष्परिणाम होंगे, जिनमें:
• सरकारी खरीद एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य आपूर्ति में दवाओं की कमी,
• लाखों श्रमिकों की आजीविका पर संकट,
• तथा भारत की “Pharmacy of the World” की वैश्विक प्रतिष्ठा को नुकसान शामिल है।
छत्तीसगढ़ केमिस्ट्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (CCDA) की प्रमुख माँगें
1. DPCO के अंतर्गत जॉब वर्क कन्वर्ज़न दरों का तत्काल पुनरीक्षण
2. संशोधित शेड्यूल-M के अनुरूप Assured Pricing Mechanism लागू किया जाए
3. 2024–26 की वास्तविक लागत संरचना को दर निर्धारण में शामिल किया जाए
जब तक गुणवत्ता अनुपालन और आर्थिक व्यवहार्यता के बीच संतुलन नहीं बनाया जाता, तब तक शेड्यूल-M का वर्तमान स्वरूप फार्मा MSME सेक्टर के लिए विनाशकारी सिद्ध हो सकता है।
और देश में दवाइयो की कमी और क़ीमत में वृद्धि की संभावना है
CCDA केंद्र सरकार से आग्रह करता है कि वह इस गंभीर विषय पर तत्काल हस्तक्षेप करे और ऐसे व्यावहारिक समाधान लागू करे, जिससे गुणवत्ता सुधार के साथ-साथ देश का फार्मा MSME ढाँचा सुरक्षित रह सके। उक्त जानकारी अविनाश अग्रवाल जनरल सेक्रेटरी
छत्तीसगढ़ केमिस्ट्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (CCDA) द्वारा दी गई ।




