पीएमओ का नाम अब ‘सेवा तीर्थ’, देशभर के राजभवन होंगे ‘लोकभवन’; शासन में सेवा और कर्तव्य की नई सोच को मिला स्वरूप


नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नाम बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ कर दिया है। इसके साथ ही देशभर के राजभवनों का नाम भी बदलकर ‘लोकभवन’ कर दिया गया है। सत्ता की भाषा को सेवा और कर्तव्य की भावना से जोड़ने के उद्देश्य से किए गए इन नाम परिवर्तनों को प्रशासनिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और नैतिक बदलाव का बड़ा संकेत माना जा रहा है।

पीएमओ के अधिकारियों के अनुसार, भारत का प्रशासनिक ढांचा एक गहरे परिवर्तन से गुजर रहा है, जहां शासन की अवधारणा ‘सत्ता’ और ‘अधिकार’ से निकलकर ‘सेवा’ और ‘जिम्मेदारी’ की ओर बढ़ रही है। यह कदम दर्शाता है कि सार्वजनिक संस्थान अब नागरिक-प्रथम शासन और जवाबदेही को अपना आधार बना रहे हैं।

78 वर्ष पुराने साउथ ब्लॉक से प्रधानमंत्री कार्यालय नया स्वरूप लिए ‘सेवा तीर्थ’ नामक अत्याधुनिक परिसर में स्थानांतरित होने जा रहा है। यह बदलाव सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

सरकार पहले भी कई अहम स्थानों के नाम बदल चुकी है। वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री आवास का नाम ‘रेस कोर्स रोड’ से बदलकर ‘लोक कल्याण मार्ग’ किया गया था, ताकि जनकल्याण की भावना को प्रमुखता दी जा सके। इसके अलावा ‘राजपथ’ का नाम बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ किया गया, जो संदेश देता है कि सत्ता कोई अधिकार नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति कर्तव्य निभाने की जिम्मेदारी है।

केंद्रीय सचिवालय का नया नाम ‘कर्तव्य भवन’ रखा गया है, जिसे जनसेवा की प्रतिबद्धता पर आधारित एक विशाल प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। अधिकारियों ने कहा, “ये नाम बदलाव केवल शब्दों का परिवर्तन नहीं, बल्कि वैचारिक सोच में बदलाव हैं। भारतीय लोकतंत्र पद की बजाय सेवा, और सत्ता की बजाय जिम्मेदारी को प्राथमिकता देता है।”

उधर, देशभर के राजभवनों के नाम बदलकर ‘लोकभवन’ रखे जा रहे हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार, ‘राजभवन’ शब्द औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाता है, जबकि ‘लोकभवन’ और ‘लोक निवास’ जनसामान्य से निकटता और लोकतांत्रिक मूल्यों को बेहतर रूप में प्रतिबिंबित करते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button