
केलो नदी से जुड़े नालों का पानी उद्योगों को देने का आरोप, जांच की मांग तेज
रायगढ़। केलो नदी को स्वच्छ और जीवंत बनाए रखने के लिए जहां जिले की जनता वर्षों से संघर्षरत है, वहीं सिंचाई विभाग के तत्कालीन अधिकारी पर प्राकृतिक जल संसाधनों के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि केलो नदी में समाहित होने वाले पहाड़ों और प्राकृतिक नालों के पानी को बेहद कम दर पर उद्योगों को आबंटित कर दिया गया, जिससे आम जनता के हक पर सीधा प्रहार हुआ है।
रायगढ़ बचाओ–लड़ेंगे रायगढ़ अभियान से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं विनय शुक्ला, मनीष अग्रवाल, अभिषेक चौहान, परेश माइति, प्रीति केरकेट्टा, ईनाम सिद्दीकी, आशुतोष शुक्ला, ऋषभ मिश्रा, आकाश श्रीवास, सुरेन्द्र पटेल, आदर्श श्रीवास, सानू माइति, शिवम कच्छवाहा, अनूप शर्मा, सानू सोनी, सूरज यादव, प्रदीप सिंह, अमन तलरेजा एवं अनिल चीकू सहित अन्य ने इस मामले को लेकर कलेक्टर रायगढ़ मयंक चतुर्वेदी को पत्र सौंपकर जांच की मांग की है।
केलो नदी जिले की जीवनरेखा
शिकायत पत्र में बताया गया है कि केलो नदी रायगढ़ जिले की पूजनीय और जीवनदायिनी नदी है। इसमें अनेक प्राकृतिक नाले, बरसाती नदियां, तालाब और पहाड़ों से बहकर आने वाला पानी सालभर प्रवाहित होता है, जिससे नदी का जल स्वाभाविक रूप से उपयोगी और जीवनीय बना रहता है। इसी उद्देश्य से केलो परियोजना के तहत डैम का निर्माण किया गया था, ताकि जलस्तर बढ़े, किसानों को सिंचाई मिले और जनता को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।
₹1 लीटर में उद्योगों को प्राकृतिक जल देने का आरोप
आरोप है कि सिंचाई विभाग में पदस्थ तत्कालीन कार्यपालन अभियंता एस.के. गुप्ता ने अपने कार्यकाल के दौरान गेरवानी और बंजारी नालों के प्राकृतिक जल को उद्योगों को आबंटित कर दिया। बताया गया कि मेसर्स सिंघल एनर्जी और मेसर्स श्याम इस्पात (तराईमाल क्षेत्र) को गेरवानी नाले का पानी मात्र ₹1 प्रति लीटर की दर से देने का अनुबंध किया गया।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह तथ्य कलेक्टर, जिला प्रशासन, सिंचाई विभाग और केलो परियोजना विभाग से छुपाया गया कि यह पानी केलो नदी परियोजना के अंतर्गत आता है, जिसे जनहित में सुरक्षित रखा जाना था।
जनता महंगे पानी को मजबूर
आंदोलनकारियों ने कहा कि एक ओर उद्योगों को प्राकृतिक जल सस्ते दामों में उपलब्ध कराया जा रहा है, वहीं आम जनता को ₹15 प्रति लीटर में बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। पीएचई और नगर निगम द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे पानी को कई रासायनिक प्रक्रियाओं से शुद्ध किया जाता है, जबकि प्राकृतिक जल पर पहला अधिकार जिले की जनता का है।
जांच समिति गठित करने की मांग
रायगढ़ बचाओ–लड़ेंगे रायगढ़ ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक समिति गठित की जाए, जिसमें
- मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत रायगढ़
- कार्यपालन अभियंता, केलो परियोजना
- प्राचार्य, शासकीय पॉलिटेक्निक रायगढ़
- प्राचार्य, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायगढ़
- कार्यपालन अभियंता, पीएचई रायगढ़
- जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी
को शामिल किया जाए। साथ ही, जांच पूरी होने तक उद्योगों को किए गए जल आबंटन अनुबंध को तत्काल रद्द कर इसकी अनुशंसा प्रदेश शासन को भेजने की मांग की गई है।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि जनता के प्राकृतिक जल अधिकारों की अनदेखी की गई, तो आने वाले समय में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।







