
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद राष्ट्रपति Donald Trump ने भारत सहित कई देशों पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ में कटौती की घोषणा की है। इस फैसले के तहत भारत से अमेरिका निर्यात होने वाले सामान पर अतिरिक्त आयात शुल्क 25 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है।
नई दरें 24 फरवरी 2026 से प्रभावी होंगी और यह व्यवस्था फिलहाल 150 दिनों के लिए अस्थायी रूप से लागू रहेगी। इस संबंध में White House ने 20 फरवरी को आधिकारिक आदेश जारी किया।
किन वस्तुओं को मिली छूट
अमेरिका ने घरेलू आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कुछ अहम उत्पादों को 15 प्रतिशत टैरिफ से बाहर रखा है। इनमें:
- दवाएं और दवा निर्माण सामग्री
- कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामान
- ऊर्जा उत्पाद
- उर्वरक
- यात्री वाहन और बसें
- एयरोस्पेस से जुड़े कुछ उत्पाद
यह नई व्यवस्था जुलाई 2026 तक लागू रह सकती है। इसके बाद अमेरिका की आगे की नीति क्या होगी, इस पर फिलहाल स्पष्टता नहीं है। भारतीय उद्योग जगत ने इस फैसले को राहत भरा कदम बताया है और दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन सुधरने की उम्मीद जताई है।
क्या है रेसिप्रोकल टैरिफ?
रेसिप्रोकल टैरिफ का अर्थ है पारस्परिक शुल्क। यानी कोई देश अमेरिकी उत्पादों पर जितना आयात शुल्क लगाएगा, अमेरिका भी उस देश से आने वाले सामान पर उतना ही शुल्क लागू करेगा।
ट्रंप प्रशासन ने 2 अप्रैल 2025 को भारत समेत करीब 60 देशों पर इस नीति को लागू करने की घोषणा की थी। यह शुल्क पहले से लागू एमएफएन (सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र) ड्यूटी के अतिरिक्त लगाया जाता है।
भारत पर टैरिफ का सफर
पिछले वर्ष अमेरिका ने भारत पर 26 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान किया था। अगस्त 2025 में रूस से कच्चा तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क लगाया गया, जिससे कुल टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया।
फरवरी 2026 में भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे पर सहमति बनने के बाद दंडात्मक शुल्क हटाया गया और टैरिफ 18 प्रतिशत कर दिया गया। अब इसे और घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है।




