सालभर से चल रही थी अफीम की खेती, जिम्मेदार विभागों की लापरवाही उजागर

डेढ़ एकड़ जमीन पर अफीम की फसल, लेकिन रिकॉर्ड में नहीं दर्ज—राजस्व और कृषि विभाग सवालों के घेरे में

रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र के आमाघाट में अवैध अफीम की खेती का बड़ा खुलासा होने के बाद प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस डेढ़ एकड़ भूमि पर लंबे समय से अफीम की खेती हो रही थी, वहां की खसरों की गिरदावरी रिपोर्ट तक तैयार नहीं की गई। न तो डिजिटल क्रॉप सर्वे हुआ और न ही मैन्युअल रिकॉर्ड में किसी फसल का उल्लेख मिला, जिससे राजस्व और कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।


सालभर तक चलती रही अवैध खेती, जिम्मेदार तंत्र को भनक तक नहीं लगी

जानकारी के अनुसार, इस जमीन पर करीब एक वर्ष से अफीम की खेती की जा रही थी, लेकिन संबंधित विभागों को इसकी कोई जानकारी नहीं थी। सामान्यतः ग्राम स्तर पर पटवारी की निगरानी में सर्वेक्षक नियुक्त किए जाते हैं, जो डिजिटल क्रॉप सर्वे ऐप के माध्यम से फसलों का रिकॉर्ड तैयार करते हैं। इसके बावजूद इतनी बड़ी अवैध गतिविधि का सामने आना लापरवाही को उजागर करता है।


कार्रवाई में 2 करोड़ से अधिक की अफीम जब्त, खेत को किया गया समतल

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर अफीम के 60,326 पौधों को नष्ट किया, जिनका कुल वजन 2877 किलोग्राम और अनुमानित कीमत करीब 1 करोड़ 90 लाख रुपए आंकी गई है। इसके अलावा, गिरफ्तार आरोपी मार्शल सांगा के ससुराल स्थित घर से 3.02 किलोग्राम अफीम (कीमत लगभग 15 लाख 10 हजार रुपए) भी जब्त की गई। इस प्रकार कुल जब्ती का आंकड़ा 2 करोड़ रुपए से अधिक का बताया जा रहा है।


गांव स्तर से लेकर जनप्रतिनिधियों तक सब अनजान, बीट प्रणाली की प्रभावशीलता पर उठे सवाल

आमाघाट में इतनी बड़ी अवैध खेती होने के बावजूद सरपंच, कोटवार, जनप्रतिनिधि और बीट प्रभारी सभी ने अनभिज्ञता जताई है। पुलिस द्वारा लगातार जन चौपाल और बीट प्रणाली को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं, इसके बावजूद इस तरह की घटना सामने आना व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है।


कृषि विभाग में मचा हड़कंप, बैठक में अधिकारियों को लगाई गई फटकार

मामले के खुलासे के बाद कृषि विभाग में हड़कंप मच गया। उप संचालक कृषि अनिल वर्मा ने तत्काल बैठक बुलाकर अधिकारियों से जवाब तलब किया और कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पुलिस को जानकारी मिल सकती है, तो विभागीय अधिकारियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी।


तहसीलदार का स्पष्टीकरण—सर्वे के दौरान खेत में नहीं थी फसल, बाद में हुई बुवाई

तमनार तहसीलदार रिचा सिंह ने सफाई देते हुए बताया कि खरीफ सीजन (जुलाई-अगस्त) में जब सर्वे किया गया, तब संबंधित खसरों में कोई फसल नहीं थी। संभवतः नवंबर में बुवाई की गई, जिसके कारण यह अवैध खेती सर्वे में दर्ज नहीं हो सकी। वर्तमान में रबी फसलों का सर्वे जारी है।


प्रशासन के लिए चुनौती—लापरवाही पर होगी कार्रवाई या फिर दब जाएगा मामला?

अवैध अफीम की इतनी बड़ी खेती का सामने आना प्रशासनिक निगरानी और जिम्मेदारी तय करने की बड़ी चुनौती बन गया है। अब देखना होगा कि इस मामले में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होती है या फिर यह मामला भी कागजों तक सीमित रह जाता है।

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