रायगढ़ के डोलोमाइट क्लस्टर पर उठे सवाल, जनसुनवाई से पहले स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ी

रायगढ़। जिले के सरिया, बरमकेला और चंद्रपुर क्षेत्र के बीच स्थित डोलोमाइट क्लस्टर को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंता और विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। क्षेत्र में बढ़ते खनन और क्रशर उद्योगों के कारण पर्यावरणीय प्रभाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

आगामी 6 और 7 अप्रैल को कटंगपाली और साल्हेओना क्षेत्र में कई खनन एवं क्रशर परियोजनाओं के विस्तार को लेकर जनसुनवाई प्रस्तावित है। इनमें आर्यन मिनरल्स एंड मेटल्स सहित पांच फर्मों द्वारा उत्पादन क्षमता बढ़ाने का प्रस्ताव शामिल है, जिसके बाद इस क्षेत्र से प्रतिवर्ष लाखों टन डोलोमाइट का अतिरिक्त उत्पादन संभावित है।

जनसुनवाई और प्रस्तावित विस्तार

  • Aryan Minerals and Metals Pvt Ltd की जनसुनवाई 7 अप्रैल को प्रस्तावित है, जिसमें उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर लगभग दोगुना करने का प्रस्ताव है
  • अन्य कंपनियों में विनायक मिनरल्स, शुभ मिनरल्स, मंगल मेटल और बालाजी माइंस एंड मिनरल्स शामिल हैं
  • 6 अप्रैल को बोन्दा क्षेत्र में चार फर्मों की संयुक्त जनसुनवाई होगी
  • कुल मिलाकर इन परियोजनाओं से करीब 7.84 लाख टन प्रतिवर्ष उत्पादन का अनुमान है

प्रदूषण और स्वास्थ्य पर चिंता

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में डोलोमाइट खदानों और क्रशरों से लगातार धूल (डस्ट) उड़ती रहती है, जिससे:

  • सांस संबंधी बीमारियां
  • फेफड़ों की समस्याएं
  • आंखों और त्वचा पर असर
  • लंबे समय में सिलिकोसिस जैसी गंभीर बीमारी का खतरा

लोगों का आरोप है कि इतने वर्षों में क्रशरों में काम करने वाले मजदूरों और आसपास रहने वाले लोगों की कोई नियमित स्वास्थ्य जांच नहीं कराई गई।

रोजगार बनाम स्वास्थ्य का सवाल

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, कई गरीब परिवार इन खदानों और क्रशरों पर निर्भर हैं, लेकिन उनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव का कोई ठोस आकलन नहीं किया गया है।

दूसरी ओर, प्रशासन का ध्यान उत्पादन और राजस्व बढ़ाने पर अधिक केंद्रित बताया जा रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर संतुलन को लेकर बहस तेज हो गई है।

आगे की स्थिति

जनसुनवाई के दौरान इन परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभाव, प्रदूषण नियंत्रण और स्थानीय स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर को लेकर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि खनन विस्तार से पहले स्वास्थ्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए।

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