अनियमित कर्मचारी फेडरेशन ने न्यूनतम मूल वेतन 30 हजार रुपये करने का सुझाव दिया

छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी फेडरेशन ने मजदूरी संहिता (छत्तीसगढ़) नियम 2026 के प्रारूप को लेकर श्रम विभाग को विभिन्न सुझाव भेजे हैं।

फेडरेशन ने न्यूनतम मूल वेतन 30 हजार रुपये निर्धारित करने सहित कई प्रावधानों में संशोधन की मांग की है।


5 लाख से अधिक कर्मचारियों पर असर का दावा

फेडरेशन का कहना है कि प्रस्तावित नियमों का असर प्रदेश के विभिन्न शासकीय कार्यालयों में कार्यरत 5 लाख से अधिक अनियमित कर्मचारियों पर पड़ेगा।

संगठन के अनुसार वर्तमान प्रारूप में कर्मचारियों के हित में कुछ आवश्यक संशोधन किए जाने की जरूरत है।


आवास, शिक्षा और संचार खर्च बढ़ाने की मांग

प्रदेश अध्यक्ष गोपाल प्रसाद साहू ने बताया कि संगठन ने मजदूरी गणना में आवासीय किराया व्यय का प्रतिशत बढ़ाने का सुझाव दिया है।

इसके अलावा बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा, मनोरंजन और अन्य आवश्यक खर्चों में संचार सुविधा जैसे मोबाइल व्यय को भी शामिल करने की मांग की गई है।


तकनीकी समिति में कर्मचारी प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग

फेडरेशन ने मजदूरी निर्धारण से जुड़ी तकनीकी समिति में कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल करने का सुझाव भी दिया है।

साथ ही शासकीय क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों को भी नियमों के दायरे में शामिल करने की मांग उठाई गई है।


“समान कार्य के लिए समान वेतन” की मांग

संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि अनियमित कर्मचारियों को समान कार्य के लिए स्थायी कर्मचारियों के समान वेतन और सुविधाएं मिलनी चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि वर्तमान न्यूनतम वेतन संरचना काफी कम है और इसे संशोधित किए जाने की आवश्यकता है।


सरकार से कर्मचारी हितैषी निर्णय की अपेक्षा

फेडरेशन ने उम्मीद जताई है कि राज्य सरकार मजदूरी नियमों पर विचार करते समय कर्मचारियों के हितों को प्राथमिकता देगी।

संगठन का कहना है कि इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और कार्यक्षमता में सुधार होगा।

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