एथेनॉल प्लांट से जल संकट की आशंका, रायगढ़ बचाओ संगठन ने मुख्य सचिव को सौंपा ज्ञापन

रायगढ़।

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जिले में प्रस्तावित एथेनॉल उद्योगों को लेकर जल संकट की आशंका जताते हुए सामाजिक संगठनों ने राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। रायगढ़ बचाओ-लड़ेंगे रायगढ़, जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा एवं जन चेतना संगठन के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर के माध्यम से छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपकर ग्राम सरायपाली, विकासखंड घरघोड़ा में स्थापित किए जा रहे नवदुर्गा फ्यूल्स प्राइवेट लिमिटेड के एथेनॉल प्लांट की अनुमति प्रक्रिया की जांच और स्वीकृति निरस्त करने की मांग की है।

संगठनों के प्रतिनिधि विनय शुक्ला, वासुदेव शर्मा, राजेश त्रिपाठी, संजय देवांगन, अभिषेक चौहान, आलोक शर्मा, परेश मैती, चंद्रमणि बरेठ, आदर्श श्रीवास, शिवम कच्छवाहा, अमन तलरेजा, सूरज यादव सहित अन्य सदस्यों ने ज्ञापन में कहा है कि प्रस्तावित उद्योग की परियोजना रिपोर्ट के अनुसार प्रतिदिन 100 केएलपीडी एथेनॉल उत्पादन किया जाएगा, जिसके लिए 571 केएलपीडी पानी की आवश्यकता बताई गई है।

ज्ञापन में दावा किया गया है कि भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग से जुड़े मंचों पर एथेनॉल उत्पादन में पानी की अधिक खपत को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की गई हैं। संगठन का आरोप है कि परियोजना को अनुमति देते समय जल संसाधनों पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभावों का पर्याप्त अध्ययन नहीं किया गया।

संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रस्तावित उद्योग के आसपास पहले से ही बड़ी संख्या में इस्पात एवं अन्य औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं, जो केलो जलाशय और अन्य जल स्रोतों पर निर्भर हैं। ऐसे में भविष्य में भूजल स्तर और पेयजल उपलब्धता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिले में भूजल स्तर लगातार गिरने की रिपोर्टें सामने आती रही हैं। ऐसे में बड़े जल उपभोग वाले उद्योगों को अनुमति देने से भविष्य में जल संकट की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है।

संगठनों ने राज्य शासन से पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने, पर्यावरणीय एवं जल संसाधन संबंधी पहलुओं की समीक्षा करने तथा जनहित में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

हालांकि, इस संबंध में परियोजना प्रबंधन एवं संबंधित विभागों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जल उपयोग एवं पर्यावरणीय प्रभाव से जुड़े दावों की पुष्टि संबंधित तकनीकी एवं शासकीय जांच के बाद ही हो सकेगी।

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