बगीचा स्वास्थ्य केंद्र की लचर व्यवस्था पर फूटा गुस्सा: डॉक्टरों की संवेदनहीनता के खिलाफ आक्रोश, 5 दिन में कार्रवाई नहीं होने पर अनिश्चितकालीन ‘नगर बंद’ और चक्काजाम की चेतावनी
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिला अंतर्गत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) बगीचा की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और डॉक्टरों की घोर संवेदनहीनता को लेकर नगरवासियों और स्थानीय व्यापारियों का आक्रोश सातवें आसमान पर पहुंच गया है। एक घायल मासूम बच्चे के इलाज में देरी और उसके बाद डॉक्टरों द्वारा की गई अभद्र टिप्पणी से नाराज नगरवासियों ने जिला प्रशासन को अल्टीमेटम जारी कर दिया है। आज 28 जून 2026 को हुई एक आपात बैठक में निर्णय लिया गया है कि यदि अगले 5 दिनों के भीतर आरोपी डॉक्टरों और खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो 6वें दिन यानी 04 जुलाई 2026 से अनिश्चितकालीन बगीचा नगर बंद और अस्पताल के सामने उग्र चक्काजाम व धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इस संबंध में आज बगीचा एसडीएम (SDM) को एक लिखित ज्ञापन भी सौंपा जा रहा है।
“आधा घंटा लेट आए तो क्या हुआ, बच्चा मर तो नहीं गया”— डॉक्टर के बोल से भड़का विवाद
मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद 18 जून 2026 की रात करीब 10 बजे शुरू हुआ। बगीचा निवासी निश्चय जायसवाल के पैर में मोटरसाइकिल की चपेट में आने से गंभीर चोट लग गई थी। लहूलुहान हालत में परिजन और स्थानीय लोग बच्चे को तुरंत उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बगीचा लेकर पहुंचे।
आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद करीब आधे घंटे तक वहां कोई भी ड्यूटी डॉक्टर मौजूद नहीं था। बच्चे की हालत बिगड़ती देख मौके पर मौजूद अस्पताल के अन्य कर्मचारियों ने डॉक्टरों को फोन कर आपातकालीन ड्यूटी पर बुलाया। चश्मदीद नगरवासियों के अनुसार, जब डॉक्टर उत्तम कुमार नागवंशी और डॉक्टर मुकेश कुमार साय अस्पताल पहुंचे, तो वे कथित तौर पर नशे की हालत में थे। जब परिजनों ने देरी से आने पर आपत्ति जताई, तो एक डॉक्टर ने बेहद संवेदनहीन और गैर-जिम्मेदाराना लहजे में कहा, “हम आधा घंटा लेट आए तो क्या हुआ, आपका बच्चा मर तो नहीं गया।” डॉक्टर के इस दुर्व्यवहार और अहंकार को देखकर उपस्थित ग्रामीण और नगरवासी दंग रह गए और मौके पर भारी आक्रोश फैल गया।
बीएमओ सुनील लकड़ा पर घोर लापरवाही और अव्यवस्थाओं को संरक्षण देने का आरोप
बगीचा के नागरिकों और व्यापार महासंघ का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बगीचा के बीएमओ (BMO) डॉक्टर सुनील लकड़ा की घोर लापरवाही के कारण hospital की व्यवस्थाएं पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं। आए दिन डॉक्टरों का गायब रहना, रात के समय मरीजों को एम्बुलेंस या प्राथमिक उपचार के लिए तड़पना और स्टाफ का आम जनता के साथ बुरा बर्ताव करना यहां की नियति बन चुका है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि बीएमओ सब कुछ जानते हुए भी लापरवाह डॉक्टरों के खिलाफ कोई ठोस दंडात्मक कदम नहीं उठाते, जिससे उनके हौसले बुलंद हैं।
व्यापारियों और नगरवासियों की बैठक में बड़ा फैसला, एसडीएम को सौंपा गया अल्टीमेटम
अस्पताल की इस लगातार जारी मनमानी और मासूम बच्चे के मामले में न्याय न मिलने से क्षुब्ध होकर आज रविवार 28 जून 2026 को बगीचा नगर के प्रबुद्ध नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और व्यापारी वर्ग की एक आवश्यक बैठक स्थानीय प्रतीक्षालय में आयोजित की गई। व्यापक विचार-विमर्श के बाद बैठक में सर्वसम्मति से निम्नलिखित कड़े निर्णय लिए गए:
- तत्काल निलंबन की मांग: बदसलूकी करने वाले दोनों डॉक्टरों (डॉ. उत्तम कुमार नागवंशी एवं डॉ. मुकेश कुमार साय) को तत्काल प्रभाव से पद से हटाकर निलंबित किया जाए।
- बीएमओ को हटाने की मांग: अस्पताल प्रबंधन में पूरी तरह विफल रहे बीएमओ डॉ. सुनील लकड़ा को बगीचा से तत्काल स्थानांतरित किया जाए।
- 5 दिनों का अल्टीमेटम: प्रशासन को इन मांगों को पूरा करने के लिए आज से 5 दिनों का समय दिया गया है।
- अनिश्चितकालीन चक्काजाम: यदि 04 जुलाई 2026 तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती है, तो 6वें दिन पूरा बगीचा शहर अनिश्चितकाल के लिए बंद रहेगा, व्यापारिक प्रतिष्ठान ठप रहेंगे और अस्पताल के मुख्य मार्ग पर उग्र चक्काजाम व धरना प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
इस आपातकालीन बैठक के तुरंत बाद, नगरवासियों का एक प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों का लिखित आवेदन और अल्टीमेटम पत्र सौंपने बगीचा एसडीएम कार्यालय रवाना हुआ। नागरिकों ने साफ कर दिया है कि इस बार वे खोखले आश्वासनों से शांत नहीं होंगे; जब तक लापरवाह डॉक्टरों पर ऑन-पेपर दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक जनता का यह आंदोलन थमने वाला नहीं है। अस्पताल की इस मनमानी और तालाबंदी की चेतावनी से अब पूरे जशपुर जिले के प्रशासनिक और स्वास्थ्य महकमे में खलबली मच गई है।


