मैनपाट में सरभंजा बाक्साइट खदान की जनसुनवाई का विरोध, ग्रामीणों ने किया बहिष्कार

बरसते पानी में पंडाल के बाहर प्रदर्शन, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने खदान परियोजना पर सरकार को घेरा

अंबिकापुर। सरगुजा जिले के मैनपाट में प्रस्तावित सरभंजा बाक्साइट खदान के लिए आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई का गुरुवार को ग्रामीणों ने जोरदार विरोध किया। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने जनसुनवाई का बहिष्कार करते हुए बारिश के बीच पंडाल के बाहर प्रदर्शन और नारेबाजी की। कार्यक्रम के दौरान अपर कलेक्टर सुनील नायक सहित प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के नेतृत्व में विरोध

विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार खदान परियोजनाओं को आगे बढ़ा रही है, जबकि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ऐसी जनसुनवाई रोक दी गई थी। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में कांग्रेस की सरकार बनती है तो मैनपाट की खदानों को बंद कराया जाएगा।

उन्होंने सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे वास्तव में मैनपाट के हितैषी हैं तो खदान परियोजना की स्वीकृति रुकवाने की पहल करें।

ग्रामसभा प्रस्ताव और सर्वे रिपोर्ट पर उठे सवाल

प्रदर्शन के दौरान सरपंच मिलसो तिर्की ने आरोप लगाया कि ग्रामसभा के प्रस्ताव पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं और हस्ताक्षर फर्जी तरीके से दर्शाए गए हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि परियोजना से संबंधित मास्टर प्लान और सर्वे रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाई गई हैं या गलत प्रस्तुत की गई हैं।

तिब्बती कैंप और पर्यटन क्षेत्र का मुद्दा

विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि प्रस्तावित खदान क्षेत्र मैनपाट के तिब्बती कैंप नंबर-5 और 6 के निकट स्थित है, जहां केंद्र सरकार की पुनर्वास नीति के तहत तिब्बती समुदाय को बसाया गया है। उनका आरोप है कि सर्वे रिपोर्ट में इन क्षेत्रों की वास्तविक दूरी सही ढंग से नहीं दर्शाई गई।

ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि मंदिर, पर्यटन स्थल और रिजर्व फॉरेस्ट जैसी महत्वपूर्ण जगहों की दूरी भी वास्तविकता से अलग बताई गई है।

विधायक बोले- विधानसभा में उठाएंगे मामला

सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने कहा कि खदान परियोजना की स्वीकृति के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाई गई हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले को विधानसभा में उठाया जाएगा और तथ्यों की जांच कराई जाएगी।

जनसुनवाई पर बना रहा विरोध का माहौल

ग्रामीणों का कहना है कि पर्यावरण, जल स्रोत, पर्यटन, कृषि और स्थानीय आजीविका पर संभावित प्रभाव को देखते हुए वे परियोजना का विरोध जारी रखेंगे। वहीं प्रशासन का कहना है कि जनसुनवाई की प्रक्रिया नियमानुसार आयोजित की गई है और प्राप्त आपत्तियों एवं सुझावों को नियमानुसार आगे की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।

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