पेपर लीक विवाद में बीए-एलएलबी छठवें सेमेस्टर की परीक्षा रद्द, 27 जुलाई से होगी दोबारा परीक्षा

छात्रों ने फैसले का किया विरोध, जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और दोषियों पर कार्रवाई की उठाई मांग

बिलासपुर, 23 जुलाई। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय ने बीए-एलएलबी छठवें सेमेस्टर के पेपर लीक मामले में मई 2026 में आयोजित परीक्षा को निरस्त कर दिया है। फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने 27 जुलाई से पुनर्परीक्षा कराने का निर्णय लिया है और नई समय-सारिणी भी जारी कर दी है।

परीक्षा रद्द होने पर छात्रों का विरोध

परीक्षा रद्द किए जाने की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में छात्र प्रशासनिक भवन पहुंचे और पुनर्परीक्षा के फैसले का विरोध किया। छात्रों ने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा पुनर्परीक्षा के निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की। उनका कहना है कि यदि पेपर लीक हुआ है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए, न कि सभी छात्रों को दोबारा परीक्षा देने के लिए मजबूर किया जाए।

जांच रिपोर्ट के बाद लिया गया फैसला

विश्वविद्यालय ने पेपर लीक मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित की थी, जिसने 6 जून को अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी थी। जांच में प्रारंभिक तौर पर यह सामने आया कि समर्थ पोर्टल हैक नहीं हुआ था, बल्कि लॉगिन आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल कर प्रश्नपत्र एवं गोपनीय दस्तावेजों तक पहुंच बनाई गई थी। समिति ने मामले की पुलिस जांच कराने की भी सिफारिश की है।

एचओडी हटाए गए, नई जांच समिति गठित

मामले में लॉ विभाग के तत्कालीन विभागाध्यक्ष एवं डीन प्रो. सुधांशु रंजन मोहापात्रा को पद से हटाया जा चुका है। उनकी जगह प्रो. प्रवीण मिश्रा को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने विभागीय जांच समिति का भी गठन किया है।

विश्वविद्यालय का पक्ष

विश्वविद्यालय के जनसंपर्क विभाग के अधिकारी डॉ. मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट को नियमानुसार संबंधित समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिसके बाद रिपोर्ट स्वीकार कर आवश्यक कार्रवाई शुरू की गई। उन्होंने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए अब समर्थ पोर्टल में लॉगिन प्रक्रिया को ओटीपी आधारित कर दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी निर्णय विस्तृत जांच और सभी तथ्यों के परीक्षण के बाद ही लिए गए हैं।

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