रायगढ़ : ‘नंद के आनंद भयो’ से गूंजा शहर, कृष्ण जन्मोत्सव पर भक्ति में डूबे श्रद्धालु

‘नानी बाई रो मायरो’ के समापन के साथ मनाई गई जन्माष्टमी, फूलों की होली ने बढ़ाया उत्साह

रायगढ़। शहर में आयोजित चार दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम का समापन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के साथ भक्तिमय माहौल में हुआ। कोतरा रोड स्थित होटल ट्रिनिटी में आयोजित ‘नानी बाई रो मायरो’ के अंतिम दिन मायरा प्रसंग के साथ कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव भी मनाया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

मायरा प्रसंग ने बांधा श्रद्धालुओं को

आयोजन के अंतिम दिन प्रस्तुत किए गए मायरा प्रसंग ने श्रद्धालुओं का विशेष ध्यान आकर्षित किया। धार्मिक प्रसंगों और भजनों के बीच कथा स्थल पर पूरे समय भक्ति का वातावरण बना रहा।

श्रद्धालु परिवार सहित कार्यक्रम में पहुंचे और कथा के विभिन्न प्रसंगों का आनंद लिया। मायरा की प्रस्तुति के दौरान कई श्रद्धालु भावुक भी नजर आए।

कृष्ण जन्मोत्सव पर गूंजे भजन और जयकारे

कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव उत्साह के साथ मनाया गया। जैसे ही जन्मोत्सव का प्रसंग आया, पूरा परिसर ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष से गूंज उठा।

भक्तों ने एक-दूसरे को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं और भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशियां मनाईं।

फूलों की होली में झूम उठे श्रद्धालु

कार्यक्रम में फूलों की होली विशेष आकर्षण रही। भक्ति संगीत के बीच श्रद्धालुओं पर फूलों की वर्षा की गई। फूलों से सजे वातावरण में लोगों ने उत्साह के साथ इस धार्मिक आयोजन का आनंद लिया।

फूलों की होली के दौरान पूरा परिसर भक्ति और उल्लास से भर गया।

वृंदावन की कथा वाचिका ने चार दिन बांधे रखा

आयोजन में वृंदावन से आईं कथा वाचिका राधा किशोरी जी ने चार दिनों तक धार्मिक कथाओं और भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को जोड़े रखा।

उनकी कथा शैली और भक्ति संगीत के दौरान श्रद्धालु बड़ी संख्या में मौजूद रहे। अंतिम दिन भी कथा और भजनों के दौरान भक्तिमय माहौल बना रहा।

चार दिनों तक धार्मिक आयोजनों से सराबोर रहा रायगढ़

चार दिवसीय कार्यक्रम में कथा, भजन, मायरा प्रसंग और कृष्ण जन्मोत्सव जैसे धार्मिक आयोजन हुए। शहर और आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालुओं की सहभागिता रही।

आयोजन के समापन पर आयोजकों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले श्रद्धालुओं और सभी सहयोगियों के प्रति आभार जताया।

भक्ति, संस्कृति और सामूहिक उत्सव का संदेश

आयोजन के अंतिम दिन कृष्ण जन्माष्टमी और मायरा प्रसंग ने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सहभागिता का भी वातावरण बनाया। श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया और धार्मिक परंपराओं से जुड़ने का अनुभव किया।

चार दिनों तक चले इस आयोजन का समापन भजन, जयकारों और फूलों की होली के बीच हुआ।

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