एसईसीएल के ख़िलाफ़ भड़का असंतोष का ज्वालामुखी छाल क्षेत्र में आर पार के मूड में ग्रामीण जनसुनवाई का होगा बहिष्कार



कुड़ेकेला । अरबों रुपये का कोयला उगलने वाली धरमजयगढ़ छाल की माटी और यहाँ के बाशिंदे सालों से सिर्फ़ तबाही प्रदूषण और उपेक्षा का दंश झेल रहे हैं। दशकों से देश के कोने कोने में अपनी कोयले की आग से ऊर्जा का संचार करने वाली साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के छाल खदान विस्तार को लेकर अब जनआक्रोश चरम पर पहुँच चुका है। आने वाली पर्यावरण जनसुनवाई की तारीख तय होते ही क्षेत्र का माहौल गरमा गया है। एक तरफ़ जहाँ क्षेत्रीय विधायक समेत तमाम जनप्रतिनिधियों ने जुबानी जंग छेड़ दी है वहीं दूसरी तरफ प्रभावित गाँवों के सीधे सादे ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। सामाजिक समाघात मूल्यांकन और पर्यावरण जनसुनवाई साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड प्रबंधन के लिए इस बार कतई आसान राह साबित नहीं होने वाली।
अरबों का कोयला बदले में सिर्फ़ धूल धुआं और धोखा:-छाल क्षेत्र पिछले कई दशकों से साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की कोल माइंस से बुरी तरह प्रभावित है। विडंबना देखिए कि जिस माटी ने सरकार और कंपनी का खजाना अरबों रुपये से भर दिया वहाँ के मूल निवासी आज पानी सड़क स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं तक के लिए तरस रहे हैं। विस्थापन का दर्द रोजगार के झूठे दिलासे और प्रदूषण के घातक दुष्परिणाम झेल रहे ग्रामीणों का कहना है कि वे अब खुद को पूरी तरह ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड ने क्षेत्र की हरियाली छीन ली नदियाँ प्रदूषित कर दीं और स्थानीय युवाओं के हाथ में केवल राख और बीमारी थमा दी।
आमने-सामने की लड़ाई आर पार के मूड में प्रभावित गाँव:-विस्तार योजना की आहट मिलते ही प्रभावित गाँवों के लोग लामबंद हो गए हैं और अब सीधे आर पार के मूड में आ चुके हैं। ग्रामीणों का साफ़ रुख़ है कि जब तक उनकी पुरानी समस्याओं का स्थायी हल नहीं निकलता विस्थापितों को उचित मुआवज़ा नौकरी और क्षेत्र को बुनियादी सुविधाएँ नहीं मिलती तब तक वे खदान के किसी भी नए विस्तार को अपनी ज़मीन पर क़दम नहीं रखने देंगे।


विधायक व जनप्रतिनिधियों का खुला विरोध – क्षेत्रीय विधायक और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रबंधन और प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाते हुए विरोध की कमान संभाल ली है।


जनसुनवाई का पुरज़ोर विरोध ग्रामीणों ने रणनीति बना ली है कि वे आगामी जनसुनवाई में सिर्फ़ विरोध दर्ज नहीं कराएँगे बल्कि एस ई सी एल के ख़िलाफ़ अपनी ज़मीनी एकजुटता का ताक़तवर प्रदर्शन करेंगे।
क्या एस ई सी एल के लिए आसान होगी राह:- दशकों का दबा हुआ गुस्सा अब सड़क पर उतरने को आतुर है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि अब कागज़ी वादों और मीठी बातों का दौर ख़त्म हो चुका है। एस ई सी एल की आगामी सामाजिक समाघात जनसुनवाई किसी विशाल जन आंदोलन की भेंट चढ़ सकती है। प्रभावित ग्रामीण एकजुट होकर अपनी जल जंगल और ज़मीन की रक्षा के लिए इस बार अंतिम लड़ाई लड़ने की तैयारी कर चुके हैं। अब जनआक्रोश के इस भारी बवंडर के आगे एस ई सी एल प्रशासन अपनी ज़मीन कैसे बचा पाता है।

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