रायगढ़ : नेशनल लोक अदालत में 12.07 लाख से अधिक प्रकरणों का निराकरण, पांच परिवार फिर साथ आए

आपसी सहमति से मामलों का निपटारा, पक्षकारों को मिला त्वरित न्याय

कुटुंब न्यायालय में राजीनामे से पांच परिवारों का दोबारा हुआ दाम्पत्य जीवन

वर्चुअल माध्यम से भी हुई पक्षकारों की भागीदारी

रायगढ़, 12 सितंबर 2026। वर्ष 2026 की तीसरी नेशनल लोक अदालत शनिवार को रायगढ़ जिला न्यायालय में आयोजित की गई। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश जितेंद्र जैन ने लोक अदालत का शुभारंभ किया। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों से अधिक से अधिक प्रकरणों का निराकरण पक्षकारों की आपसी सहमति और राजीनामे के आधार पर कराने का आग्रह किया।

12 लाख से ज्यादा मामलों का हुआ निपटारा

रायगढ़ जिले में आयोजित नेशनल लोक अदालत के दौरान लंबित मामलों के साथ प्री-लिटिगेशन प्रकरणों को मिलाकर कुल 12 लाख 7 हजार 255 प्रकरणों का निराकरण किया गया।

लोक अदालत के माध्यम से पक्षकारों की सहमति से मामलों का समाधान किया गया, जिससे उन्हें लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया के बजाय आपसी समझौते के जरिए त्वरित राहत मिली।

पांच परिवारों में फिर लौटी वैवाहिक जिंदगी

लोक अदालत का एक महत्वपूर्ण परिणाम कुटुंब न्यायालय, रायगढ़ में देखने को मिला। यहां आपसी राजीनामे के आधार पर पांच परिवारों को दोबारा दाम्पत्य जीवन में पुनर्स्थापित किया गया।

आपसी विवाद के कारण अलग रह रहे इन परिवारों के बीच समझौते के बाद पुनः साथ रहने का निर्णय हुआ। न्यायालय की ओर से संबंधित परिवारों को उनके सुखद और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी गईं।

वर्चुअल माध्यम से भी हुआ मामलों का समाधान

लोक अदालत में पक्षकारों की सुविधा के लिए वर्चुअल माध्यम का भी इस्तेमाल किया गया। इसके जरिए पक्षकारों की उपस्थिति दर्ज कराई गई और आपसी सहमति के आधार पर मामलों का निराकरण किया गया।

इस व्यवस्था के माध्यम से लोक अदालत की मूल भावना ‘न्याय आपके द्वार’ को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया।

बैंक, बीमा और फाइनेंस कंपनियों के प्रतिनिधि रहे मौजूद

लोक अदालत के दौरान जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में विभिन्न बैंकों, फाइनेंस कंपनियों, विद्युत विभाग और बीमा कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। अधिवक्ताओं ने भी पक्षकारों को मामलों के आपसी सहमति से निराकरण की प्रक्रिया में सहयोग दिया।

लोक अदालत का उद्देश्य विवादों को बातचीत और समझौते के माध्यम से समाप्त कर पक्षकारों को सरल, सुलभ और त्वरित न्याय उपलब्ध कराना रहा।

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