कोर्ट में पहुंचा मामला
इस पूरे मामले को लेकर किसान मोर्चा की ओर से न्यायालय में आवेदन दिया गया। 23 दिसंबर को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान आवेदक अनिल दुबे की जमानत मुचलका स्वीकार की गई। इसके साथ ही न्यायालय ने तुमगांव पुलिस को स्पष्ट आदेश दिया कि जब्त की गई छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति को आवेदक को सुपुर्द किया जाए।
पुलिस ने सौंपी मूर्ति
न्यायालय के आदेश के पालन में पुलिस ने नायब तहसीलदार की मौजूदगी में छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति को छत्तीसगढ़ किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों को सौंप दिया। इस दौरान पूरी प्रक्रिया को कानूनी और प्रशासनिक नियमों के तहत पूरा किया गया।
गांव में दिखा उत्साह
मूर्ति मिलने के बाद छत्तीसगढ़ किसान मोर्चा के सदस्यों ने बाजे-गाजे के साथ गांव में मूर्ति की शोभायात्रा निकाली। ग्रामीणों ने फूल-मालाओं से छत्तीसगढ़ महतारी का स्वागत किया। कई लोगों ने इसे छत्तीसगढ़ की अस्मिता और संस्कृति से जुड़ा विषय बताया।
प्रशासन और कानून व्यवस्था पर चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम के बाद एक बार फिर यह सवाल उठा है कि सार्वजनिक स्थलों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर मूर्ति स्थापना को लेकर स्पष्ट नीति और संवाद कितना जरूरी है। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि कानून और यातायात व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है, वहीं किसान मोर्चा इसे जनभावनाओं से जुड़ा मुद्दा बता रहा है।
फिलहाल, कोर्ट के आदेश के बाद मामला शांत होता दिखाई दे रहा है और छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति को लेकर उपजा विवाद अब सुलझता नजर आ रहा है।