मतदाता सूची विशेष पुनरीक्षण से प्रदेश में हलचल, 27.40 लाख नाम विलोपन के आवेदन मिले

रायपुर। राज्य में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। आंकड़े चौंकाने वाले हैं। एक ओर लाखों नाम हटाने की प्रक्रिया चल रही है, तो दूसरी ओर हजारों नए मतदाता अपने अधिकार के लिए आवेदन कर रहे हैं। चुनाव आयोग को ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन से पहले प्रदेश में 27 लाख 40 हजार 759 फार्म-7 प्राप्त हो चुके हैं। इनमें नाम विलोपन की मांग की गई है। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे नाम शामिल हैं जिन्हें अनकलेक्टेबल बताया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार 23 दिसंबर से अब तक 23,096 मतदाताओं ने नाम सुधार के लिए आवेदन किया है। ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद प्राप्त आवेदनों में 79,787 फार्म 6/6ए नए नाम जोड़ने के लिए, 2,140 फार्म 7 नाम हटाने के लिए और 23,096 फार्म 8 नाम में सुधार के लिए आए हैं। इससे स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में युवा, नवविवाहित और स्थानांतरित मतदाता अपने अधिकार को लेकर जागरूक हुए हैं और सूची में नाम दर्ज कराने आगे आए हैं।

राजनीतिक दलों की ओर से दावे

राजनीतिक दलों को भी दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अधिकार है। 23 दिसंबर 2025 से सात जनवरी 2026 शाम चार बजे तक केवल 15 दिनों में एक करोड़ 84 लाख 95 हजार 920 दावे और आपत्तियां दर्ज की जा चुकी हैं। इन आंकड़ों ने सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है। आने वाले चुनाव से पहले मतदाता सूची सबसे बड़ा रणक्षेत्र बन चुकी है।

राष्ट्रीय दलों में सबसे आगे भारतीय जनता पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस हैं। भारतीय जनता पार्टी ने 20,017 बीएलए के माध्यम से 183 नाम शामिल कराने के लिए दावे दर्ज किए हैं। कांग्रेस ने 17,681 बीएलए सक्रिय करते हुए नाम जोड़ने के लिए दावे प्रस्तुत किए हैं। बहुजन समाज पार्टी ने 501 बीएलए के जरिए दावे लगाए हैं। आम आदमी पार्टी ने 119 बीएलए मैदान में उतारे हैं। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने 528 आवेदन प्रस्तुत किए हैं। कुल मिलाकर राजनीतिक दलों की ओर से 38,846 दावे और आपत्तियां दाखिल की गई हैं, जिनमें से 228 मामलों पर कार्रवाई की जा चुकी है।

एफिडेविट से नहीं आया कोई मामला

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 2(ग) के तहत किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दिए जाने वाले शपथपत्र के माध्यम से न तो समावेशन और न ही विलोपन के लिए कोई आवेदन प्राप्त हुआ है। इसका अर्थ है कि अब तक अधिकांश दावे सीधे मतदाताओं या राजनीतिक दलों के माध्यम से ही आए हैं।

अधिकारियों का क्या कहना

नवीन ठाकुर, उप निर्वाचन अधिकारी, रायपुर का कहना है कि “यह अभियान मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाने के लिए है। केवल वही आवेदन मान्य होंगे जो निर्धारित फार्म और आवश्यक घोषणा के साथ प्रस्तुत किए गए हैं। सामान्य शिकायतें या बिना दस्तावेज के दिए गए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।”

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