
किरोड़ीमल नगर क्षेत्र में कुछ ईंट भट्ठे छोटे स्तर पर नहीं, बल्कि प्लांट के रूप में कई एकड़ जमीन में संचालित किए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस पूरे नेटवर्क का मुख्य सरगना चेतन चंद्र है, जिसके संरक्षण में आसपास के इलाकों में कई छोटे-बड़े अवैध ईंट भट्ठे धड़ल्ले से चल रहे हैं। इन भट्ठों में न तो खनिज विभाग की अनुमति ली गई है और न ही पर्यावरणीय नियमों का पालन किया जा रहा है।
माइनिंग विभाग कुंभकरण की नींद में?
ईंट निर्माण में प्रयुक्त मिट्टी लघु खनिज की श्रेणी में आती है, जिसके उत्खनन और उपयोग के लिए खनिज विभाग से अनुमति अनिवार्य होती है। नियमों के अनुसार बिना अनुमति मिट्टी का उत्खनन करना अवैध खनन की श्रेणी में आता है, जिस पर भारी जुर्माना, सामग्री जब्ती और आपराधिक प्रकरण तक दर्ज किया जा सकता है।
इसके बावजूद क्षेत्र में खुलेआम मिट्टी का उत्खनन और ईंट निर्माण जारी है, जिससे माइनिंग विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सीएमओ की भूमिका पर भी सवाल
यह पूरा मामला नगर पंचायत किरोड़ीमल नगर क्षेत्र का है, ऐसे में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) की जिम्मेदारी भी कम नहीं है। नियमों के तहत नगर पंचायत क्षेत्र में किसी भी प्रकार का व्यावसायिक प्रतिष्ठान—चाहे वह ईंट भट्ठा ही क्यों न हो—नगर पंचायत की अनुमति, व्यापार लाइसेंस, अग्नि सुरक्षा और पर्यावरणीय मानकों के अधीन आता है।
सीएमओ के पास यह अधिकार है कि
अवैध रूप से संचालित ईंट भट्ठों को सील करें
बिना अनुमति चल रहे प्रतिष्ठानों पर जुर्माना लगाएं
माइनिंग विभाग व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को संयुक्त कार्रवाई के लिए पत्र लिखें
गंभीर मामलों में एफआईआर दर्ज कराने की अनुशंसा करें
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सीएमओ को अपने ही क्षेत्र में चल रहे इन अवैध ईंट भट्ठों की जानकारी नहीं है, या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गई हैं?
पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर खतरा
इन अवैध ईंट भट्ठों से निकलने वाला धुआं, राख और धूल आसपास के इलाकों में प्रदूषण फैला रहे हैं। खेतों की उपज प्रभावित हो रही है, वहीं स्थानीय लोगों को सांस संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा मिट्टी के अवैध उत्खनन से भूमि की उर्वरता पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
अब देखना यह होगा…
अब यह देखना अहम होगा कि किरोड़ीमल नगर पंचायत के सीएमओ इस गंभीर मामले में कठोर कार्रवाई करते हैं या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडी फाइलों में दबा दिया जाएगा। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो अवैध ईंट भट्ठों का यह नेटवर्क और भी फैल सकता है, जिसका खामियाजा पर्यावरण, प्रशासन और आम जनता—तीनों को भुगतना पड़ेगा।
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले की जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे, ताकि अवैध ईंट भट्ठों के इस गोरखधंधे पर पूर्णत रोक लगाई जा सके।



